उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहा विवाद बुधवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। लगातार विरोध और श्रद्धालुओं की नाराजगी के बाद जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मंदिर की प्रतिमा को हटाने या दूसरी जगह ले जाने का कोई फैसला संबंधित पक्षों की सहमति के बिना नहीं लिया जाएगा। प्रशासन ने कहा है कि विकास कार्यों के साथ लोगों की धार्मिक भावनाओं और उज्जैन की ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण भी उसकी प्राथमिकता है। बुधवार सुबह से ही खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। दर्शन के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद समेत कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और हनुमान जी के जयकारे लगाए। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि मंदिर और प्रतिमा को लेकर कोई भी निर्णय श्रद्धालुओं की सहमति के बिना नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि वर्षों से जिस स्थान पर प्रतिमा स्थापित है, उसे वहीं रहने दिया जाए।
महामंडलेश्वर भी पहुंचे मंदिर
विवाद के बीच आह्वान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद महाराज भी गुरुकुल के छात्रों और समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे। गुरुकुल के विद्यार्थियों ने प्रतिमा के सामने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। महामंडलेश्वर ने कहा कि खड़े हनुमान की प्रतिमा करीब दो सौ वर्षों से इसी स्थान पर विराजमान है और श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा को हटाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं और अब प्रशासन को जनभावनाओं को समझते हुए इसे यहीं रहने देना चाहिए।
कांग्रेस विधायकों ने भी जताया विरोध
मंदिर को लेकर चल रहे विरोध में कांग्रेस के विधायक महेश परमार और दिनेश जैन भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। दोनों नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। रैली के दौरान भगवा ध्वज, ढोल-नगाड़े और धार्मिक नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की। महेश परमार ने कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि जनता प्रतिमा को हटाने के पक्ष में नहीं है। वहीं दिनेश जैन ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले को लेकर लोगों को स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने प्रतिमा को हटाने की कोशिश का विरोध करने की बात कही और सवाल उठाया कि आखिर इसे हटाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
प्रशासन ने जारी किया प्रेस नोट
लगातार बढ़ते विरोध के बाद प्रशासन की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई। एसडीएम एलएन गर्ग ने जारी बयान में कहा कि खड़े हनुमान से जुड़े मामले में श्रद्धालुओं और नागरिकों की आस्था का पूरा सम्मान किया जाएगा। सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक, सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन में विकास और सड़क चौड़ीकरण जैसे काम जरूरी हैं, लेकिन शहर की धार्मिक पहचान, आस्था और विरासत का संरक्षण भी उतना ही अहम है। अधिकारियों ने कहा कि श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद सभी पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
कई प्रयासों के बाद भी नहीं हट सकी प्रतिमा
दरअसल, कंठाल चौराहा से छत्रीचौक मार्ग के चौड़ीकरण की योजना के दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आ रहा है। इसी वजह से प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई थी। नगर निगम की टीम ने पिछले गुरुवार रात करीब 11 बजे शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सके। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। हालांकि प्रतिमा को हटाने को लेकर अब तक कोई रास्ता नहीं निकल सका है। लगातार विरोध के बीच प्रशासन के ताजा बयान से फिलहाल साफ हो गया है कि आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों से बातचीत और सहमति के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।





















