राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद नगर निगम ने अब जर्जर और नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 6 सितंबर को हुए हादसे में सात लोगों की जान जाने के बाद इलाके में स्थित दूसरी कमजोर इमारतों की भी जांच कराई गई। जांच में कई भवन बेहद खतरनाक स्थिति में पाए गए हैं। MCD के सर्वे में सत्य निकेतन समेत आसपास के इलाकों में कुल 51 जर्जर इमारतों की पहचान हुई है। इनमें से 27 भवनों को गिराने के आदेश दिए गए हैं। वहीं सात इमारतों को सील किया जा चुका है, जबकि 35 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। बुधवार से वेस्ट जोन और शाहदरा साउथ जोन में ऐसी इमारतों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होने जा रही है।
कमजोर इमारतों को पहले दिया जा रहा सहारा
डिमोलिशन से पहले निगम की टीम उन भवनों को लोहे के मजबूत बीम और दूसरे सपोर्ट से सहारा दे रही है, जिनकी हालत बेहद खराब है। इसका उद्देश्य कार्रवाई के दौरान अचानक मलबा गिरने से आसपास के मकानों और कर्मचारियों को नुकसान से बचाना है। सत्य निकेतन में हॉस्टल डेज के पास मौजूद एक जर्जर इमारत को भी हटाने की तैयारी चल रही है। मंगलवार को इसके ऊपर बने वॉटर प्लांट और कैंटीन को हटाया गया। टिन की छत को गैस कटर की मदद से काटकर निकाला गया, जिसके बाद अब पूरी बिल्डिंग को सुरक्षित तरीके से गिराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
दरारों वाली इमारतों में रह रहे थे छात्र
सर्वे के दौरान निगम अधिकारियों को ऐसी कई इमारतें मिलीं, जिनमें जर्जर हालत के बावजूद छात्र और दूसरे लोग रह रहे थे। कुछ छात्रों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाकर भवन की स्थिति दिखाई। इन वीडियो में दीवारों पर दिखाई दे रही दरारों को लेकर छात्र अपनी चिंता जाहिर करते नजर आए। हादसे के बाद सत्य निकेतन के कई छात्र सुरक्षित ठिकाने की तलाश में इलाके से बाहर जा रहे हैं। घटना के बाद छात्रों के परिवारों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुआ निरीक्षण
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG और निजी हॉस्टलों की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद MCD की टीमें अलग-अलग हॉस्टलों और PG में जाकर जरूरी दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों की नजर खास तौर पर फायर NOC, हॉस्टल संचालन की अनुमति और इमरजेंसी एग्जिट जैसी व्यवस्थाओं पर है। निरीक्षण में कई ऐसी इमारतें सामने आईं, जहां आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। कुछ भवनों में फायर विभाग की NOC भी नहीं मिली। मंगलवार को लक्ष्मी नगर, ललिता पार्क और शकरपुर इलाके के 35 PG को नोटिस दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, जहां सुरक्षा मानकों में सुधार नहीं किया गया, वहां आगे सीलिंग की कार्रवाई भी हो सकती है।
तीन महीने में 959 संपत्तियों पर कार्रवाई
MCD के अनुसार, दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ पिछले तीन महीनों से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 1 जून से 31 अगस्त के बीच 959 संपत्तियों पर डिमोलिशन की कार्रवाई की गई। वहीं 1 जून से 8 सितंबर तक 471 संपत्तियों को सील किया गया। इसी अवधि में अनधिकृत निर्माण के मामलों में 1,551 शो-कॉज नोटिस जारी किए गए, जबकि अवैध निर्माण हटाने के लिए 753 डिमोलिशन ऑर्डर जारी हुए।
हादसे की जांच में लेबर कॉन्ट्रैक्टर गिरफ्तार
सत्य निकेतन हादसे की पुलिस जांच भी जारी है। सोमवार को गिरफ्तार किए गए हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं महेश को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। पूछताछ में महेश ने पुलिस को बताया कि वह अपने माता-पिता की तरफ से इमारत की देखरेख करता था। उसके अनुसार अगस्त 2025 में यह भवन ‘हॉस्टल डेज’ के संचालकों को किराए पर दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक जगह बढ़ाने के लिए भी निर्माण संबंधी काम किया जा रहा था। हादसे के दिन इमारत गिरने की सूचना मिलने के बाद महेश दिल्ली से निकलकर राजस्थान के भिवाड़ी में अपने ससुराल चला गया था। इस मामले में पुलिस ने लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा है। उससे पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है।
PG को लेकर नया कानून लाने की तैयारी
दिल्ली सरकार अब PG और हॉस्टल व्यवस्था को भी एक तय कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी कर रही है। सरकार विधानसभा में ‘पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल’ पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली में संचालित होने वाले प्रत्येक PG का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। संचालकों को 90 दिनों के भीतर संबंधित जोन अथॉरिटी से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पुलिस, MCD और स्थानीय प्रशासन से जरूरी मंजूरी लेने का प्रावधान रखा गया है। रजिस्ट्रेशन के बाद प्रत्येक PG को अलग PG Registration Number (PGRN) दिए जाने की योजना है।
GovPG पोर्टल पर मिलेगी PG की जानकारी
प्रस्तावित व्यवस्था में GovPG पोर्टल भी बनाया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड PG और हॉस्टल की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें किराया, उपलब्ध सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। छात्र इस पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। खास बात यह है कि शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट के लिए भी नियम
नए कानून में PG के किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर भी नियम बनाए जाने की योजना है। क्षेत्र के हिसाब से किराए की सीमा तय करने के लिए रेंट रेगुलेशन कमेटी बनाए जाने का प्रस्ताव है। PG संचालक अधिकतम तीन महीने की सिक्योरिटी राशि ले सकेंगे। इससे अधिक रकम एडवांस के रूप में लेने पर रोक होगी। PG छोड़ने के लिए 30 दिन पहले सूचना देना जरूरी होगा। इसके अलावा किसी छात्र के साथ उसके लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकेगा।
CCTV से लेकर सुरक्षा गार्ड तक होंगे जरूरी
प्रस्तावित नियमों में PG में सुरक्षा व्यवस्था को भी अनिवार्य बनाने की तैयारी है। सभी प्रवेश द्वार और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाने होंगे और उनकी रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। जिन PG में 15 से ज्यादा छात्र रहेंगे, वहां रात के समय सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था जरूरी होगी। विजिटर की एंट्री के लिए रजिस्टर रखना भी अनिवार्य होगा। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए PG से 500 मीटर के दायरे में वार्डन की उपलब्धता का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। हादसे के बाद सरकार और MCD की इन कार्रवाइयों का मकसद राजधानी में जर्जर इमारतों और बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे PG-हॉस्टलों पर लगाम लगाना है।





















