सुप्रीम कोर्ट से एरियर का रास्ता साफ, ₹9 लाख तक बकाया मिलने की उम्मीद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत 24 हजार से अधिक अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) और संबंधित संशोधन आवेदनों को खारिज किए जाने के बाद वर्षों से लंबित एरियर के भुगतान का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। अनुदेशक संगठनों का दावा है कि प्रत्येक अनुदेशक को लगभग ₹9 लाख तक का एरियर मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 4 फरवरी 2026 को दिए गए फैसले में पुनर्विचार की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही राज्य सरकार की समीक्षा याचिका खारिज कर दी गई और सभी लंबित संशोधन एवं स्थगन आवेदन भी स्वतः निस्तारित माने गए।
2017-18 से बढ़े मानदेय का एरियर मिलने की उम्मीद
परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि एक दशक से अधिक समय तक अनुबंधित अनुदेशकों को केवल ₹7,000 प्रतिमाह मानदेय पर रखना उचित नहीं है। न्यायालय ने 2017-18 से ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय देने तथा उस अवधि से देय अंतर राशि (एरियर) का भुगतान करने के निर्देश दिए थे।
संघ का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश के 24,296 अनुदेशकों को लगभग ₹9-9 लाख तक का बकाया मिल सकता है।
नियमितीकरण की मांग भी तेज
अनुदेशक संगठन ने मुख्यमंत्री, बेसिक शिक्षा मंत्री और शासन से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप जल्द शासनादेश जारी कर एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अनुदेशकों के नियमितीकरण और स्थायी नीति बनाने की दिशा में भी शीघ्र निर्णय लिया जाए।
शासन करेगा विधिक राय के बाद फैसला
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा है कि मामले में शासन स्तर पर विधिक परामर्श लिया जाएगा। शासन के निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ध्यान दें: फिलहाल एरियर का भुगतान शुरू होने का औपचारिक सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। एरियर और अन्य लाभों का अंतिम क्रियान्वयन शासन के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगा।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की रिव्यू याचिका खारिज की।
- 24 हजार से अधिक अनुदेशकों को राहत मिलने की उम्मीद।
- प्रत्येक अनुदेशक को लगभग ₹9 लाख तक एरियर मिलने का दावा।
- 2017-18 से ₹17,000 मानदेय के अंतर का भुगतान मामला।
- शासन स्तर पर विधिक राय के बाद आगे की कार्रवाई होगी।







