UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सभी प्रमुख दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया था। अब बीजेपी इस चुनौती का जवाब देने के लिए दलित वोट बैंक को साधने की नई रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश में एक लंबे सामाजिक अभियान की योजना बनाई है। पार्टी ‘श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ के जरिए दलित समाज तक पहुंच बनाने की तैयारी में है। यह अभियान 29 जुलाई 2026 से शुरू होकर फरवरी 2027 तक चलाने की योजना है।
काशी से शुरू होगा अभियान, गांव-गांव पहुंचेगा संदेश
बीजेपी के इस अभियान की शुरुआत वाराणसी स्थित संत रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से होगी। यहां से पवित्र मिट्टी को संकल्प कलश में लेकर पूरे प्रदेश में यात्रा निकाली जाएगी। पार्टी की योजना है कि यह अभियान दलित बस्तियों और गांवों तक पहुंचे, जहां सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम, सत्संग और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेशभर के रविदास मंदिरों में विशेष कार्यक्रम और दीपोत्सव आयोजित करने की भी तैयारी है। इसके जरिए बीजेपी धार्मिक जुड़ाव के साथ सामाजिक संपर्क बढ़ाने की कोशिश करेगी।
PDA के जवाब में बीजेपी का नया दांव
राजनीतिक जानकारों की नजर में बीजेपी का यह अभियान सीधे तौर पर दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। खासतौर पर जाटव और गैर-जाटव दलित वोटों को लेकर सभी दल अपनी रणनीति बनाते रहे हैं। बीजेपी का लक्ष्य है कि संत रविदास के विचारों, सामाजिक समरसता और केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं के जरिए दलित समाज में अपनी पकड़ मजबूत की जाए।
क्या अखिलेश यादव की रणनीति पर पड़ेगा असर?
2024 के चुनाव में अखिलेश यादव की PDA रणनीति को काफी सफलता मिली थी। इस फॉर्मूले के जरिए सपा ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की थी। अब बीजेपी का नया अभियान इसी सामाजिक समीकरण को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बीजेपी दलित समुदाय के एक बड़े हिस्से तक अपनी पहुंच बनाने में सफल रहती है तो सपा के जातीय समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
मायावती की चुनौती भी बढ़ सकती है
उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति की सबसे बड़ी पहचान रही बहुजन समाज पार्टी के लिए भी 2027 का चुनाव अहम माना जा रहा है। बीजेपी की यह रणनीति अगर सफल होती है तो बसपा के पारंपरिक वोट बैंक पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि बसपा अपने संगठन और पुराने कैडर के भरोसे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
विपक्ष ने बीजेपी की रणनीति पर उठाए सवाल
बीजेपी के अभियान को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी चुनाव के समय महापुरुषों और संतों के नाम पर राजनीति करती है। विपक्ष का कहना है कि संत रविदास सभी के लिए श्रद्धा का विषय हैं, लेकिन बीजेपी उन्हें चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह अभियान सामाजिक एकता और संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
2027 में किसके पक्ष में जाएगा दलित वोट?
उत्तर प्रदेश की सत्ता की राह में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी का रविदास अभियान और अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला आमने-सामने नजर आ रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि बीजेपी का यह सामाजिक समीकरण कितना असर दिखाता है और क्या अखिलेश यादव अपनी पिछली रणनीति को और मजबूत कर पाते हैं। इसका अंतिम फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव के नतीजे ही करेंगे।







