किसान ने राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत का लगाया आरोप
बाराबंकी। संक्रमणीय भूमिधर भूमि के सीमांकन को लेकर बाराबंकी में नया विवाद सामने आया है। एक किसान ने पूर्व और वर्तमान लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए तहसील प्रशासन से शिकायत की है। शिकायत में राजस्व कर्मियों की कथित मिलीभगत से विवादित भूमि पर कब्जा कराने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ढेमा गांव निवासी चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि उनकी गाटा संख्या 1181 की संक्रमणीय भूमिधर भूमि का करीब दो माह पहले धारा-24 के तहत राजस्व अधिकारियों द्वारा सीमांकन कराया गया था। इसके बाद उन्होंने भूमि पर पिलर लगवाकर तारबंदी भी करा दी थी।
पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान गांव निवासी हरिश्चंद्र रावत ने तत्कालीन लेखपाल की कथित मिलीभगत से उक्त भूमि को घरौनी में अपने नाम दर्ज करा लिया। शिकायत पर एसडीएम ने घरौनी को विवादित मानते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
चंद्रप्रकाश का आरोप है कि इसके बावजूद वर्तमान लेखपाल ने सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना 8 जुलाई को कथित रूप से उसी विवादित घरौनी के आधार पर दोबारा पैमाइश शुरू कर दी, जिससे गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पीड़ित के अनुसार, लेखपाल के लौटने के बाद हरिश्चंद्र अपने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचे और जमीन पर लगे पिलर उखाड़कर झोपड़ी रख दी। विरोध करने पर उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
चंद्रप्रकाश ने बताया कि उन्होंने 9 जुलाई को हरिश्चंद्र समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शुक्रवार को तहसीलदार शशांक नाथ उपाध्याय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लेखपाल को मौके पर जाकर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। राजस्व विभाग या आरोपित पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






















