राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में हिंदी भाषा के विकास और कार्यालयी कार्यों में इसके अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 31 अगस्त 2026 को अधिकारियों के लिए हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में हिंदी की संवैधानिक स्थिति, उपयोगिता और डिजिटल माध्यमों से इसके प्रभावी प्रयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यशाला की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आईआईटी खड़गपुर से आए डॉ. राजीव कुमार रावत ने अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने संविधान में हिंदी के महत्व और विभिन्न क्षेत्रों में इसके बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला।
हिंदी के लिए उपलब्ध डिजिटल संसाधनों की दी जानकारी
डॉ. राजीव कुमार रावत ने कहा कि हिंदी के प्रयोग में सुविधा के लिए भारत सरकार की ओर से कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप उपलब्ध कराए गए हैं। इन माध्यमों की सहायता से हिंदी की जानकारी और कार्यालयी उपयोग को आसान बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन वेबसाइट और एप तक पहुंच निःशुल्क है, जिससे कर्मचारी अपनी भाषा संबंधी दक्षता को बेहतर बना सकते हैं।
हिंदी को सम्मान और गरिमा दिलाना हमारा दायित्व: निदेशक
संस्थान की निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए हिंदी के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों से भी जुड़ी हुई है। सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के साथ-साथ हिंदी को उचित सम्मान दिलाना हम सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों से अपने दैनिक और कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने की अपील की।
करीब 40 कार्मिकों ने की सहभागिता
कार्यशाला में श्री अनुज सिंह, श्री कमलेश कुमार, डॉ. विनय कुमार, डॉ. अशोक कुमार, श्री संजय चौहान, डॉ. प्रशांत भीमराव धनके, श्री अनूप कुमार कनौजिया, श्री अखिलेश कुमार पांडे, श्री अजय कुमार अवस्थी, श्री वीरेन्द्र कुमार, डॉ. अनंत लक्ष्मी रंगनाथन, डॉ. लोकेश बाबर, श्री महेन्द्र कुमार और श्री कुलदीप सिंह राना सहित लगभग 40 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मल्लिका द्विवेदी ने किया। वहीं कार्यशाला के सफल आयोजन में श्री दया शंकर मिश्र और श्री उमेश चंद्र पांडे का विशेष सहयोग रहा। संस्थान की ओर से भविष्य में भी हिंदी के प्रचार-प्रसार और कार्यालयी कार्यों में इसके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही गई।





















