Sade Sati on Children: जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता उसकी सेहत, पढ़ाई और भविष्य को लेकर हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान देते हैं। ऐसे में अगर बच्चे की जन्म राशि पर साढ़ेसाती चल रही हो या कुंडली में राहु-केतु जैसे ग्रहों की स्थिति को लेकर कोई बात सामने आए, तो स्वाभाविक रूप से परिवार की चिंता बढ़ जाती है। कई लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या इतनी कम उम्र में बच्चे को ग्रह दोष या साढ़ेसाती का सामना करना पड़ता है? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कम उम्र के बच्चों के मामले में ग्रहों के प्रभाव को अलग तरह से देखा जाता है। इसी विषय पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो के माध्यम से अपनी बात रखी है।
छोटे बच्चों पर ग्रह दोष को लेकर क्या बोले देवकीनंदन ठाकुर?
देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, अगर किसी छोटे बच्चे की कुंडली में राहु-केतु या किसी अन्य ग्रह की स्थिति को खराब बताकर डराया जा रहा है, तो माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि बच्चे की उम्र महज 5 वर्ष है और कोई व्यक्ति उसके ग्रहों को लेकर नकारात्मक बातें कहता है, तो ऐसी बातों को नजरअंदाज करना बेहतर है। उनके मुताबिक, 16 वर्ष की आयु से पहले ग्रहों के प्रभाव को लेकर उसी तरह विचार नहीं करना चाहिए, जिस तरह किसी वयस्क की कुंडली के बारे में किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि 12 वर्ष की उम्र तक बच्चा अपने कर्मों का पूर्ण जिम्मेदार नहीं माना जाता और उसके कर्मों का प्रभाव माता-पिता से जोड़कर देखा जाता है।
12 साल तक माता-पिता के कर्मों का असर?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में बच्चों की शुरुआती उम्र को विशेष माना गया है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष की आयु तक बच्चे के कर्मों का फल माता-पिता से जुड़ा होता है। इसलिए इस दौरान माता-पिता को बच्चे की आदतों और संस्कारों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने माता-पिता को बच्चों से अच्छे कार्य करवाने और धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने की सलाह दी है। उन्होंने बच्चों को हनुमान चालीसा का पाठ कराने और भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम याद करवाकर उनका नियमित स्मरण कराने की बात कही।
क्या साढ़ेसाती बच्चों को प्रभावित नहीं करती?
ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर साढ़ेसाती का संबंध व्यक्ति की जन्म राशि और शनि के गोचर से माना जाता है। हालांकि, छोटे बच्चों के मामले में इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग ज्योतिषियों की अलग-अलग राय हो सकती है। इसलिए केवल साढ़ेसाती या किसी ग्रह की स्थिति देखकर बच्चे के भविष्य को लेकर डरना उचित नहीं माना जाता। खासतौर पर बच्चों के स्वास्थ्य, व्यवहार या जीवन में आने वाली सामान्य परेशानियों को केवल ग्रह दोष से जोड़ना सही नहीं है। किसी भी धार्मिक या ज्योतिषीय मान्यता को समझते समय उसके साथ व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
ज्योतिष में बच्चों की उम्र को लेकर क्या मान्यता है?
ज्योतिषीय परंपरा में माना जाता है कि जन्म के बाद शुरुआती वर्षों में बच्चे का जीवन काफी हद तक उसके परिवार और माता-पिता के वातावरण से प्रभावित होता है। इसी वजह से कई धार्मिक मान्यताएं इस उम्र में माता-पिता के कर्म, संस्कार और वातावरण को विशेष महत्व देती हैं। हालांकि, ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता। इसलिए माता-पिता को बच्चे की किसी भी परेशानी के लिए केवल ग्रहों को जिम्मेदार मानने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह भी लेनी चाहिए।






















