Ayodhya Ramayan Mela 2026: रामनगरी अयोध्या एक बार फिर धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के रंग में रंगने को तैयार है। इस वर्ष 45वां रामायण मेला 13 से 16 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। रविवार को हुई रामायण मेला समिति की बैठक में आयोजन की तारीखों पर सहमति बनी। समिति की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने की तैयारी है, जबकि मेले के समापन अवसर पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को बुलाने का प्रस्ताव रखा गया है।
मुख्यमंत्री को न्योता देने की जिम्मेदारी महंत अवधेश दास को
रामायण मेला समिति की बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। बैठक में चार दिवसीय आयोजन की तैयारियों, कार्यक्रमों की रूपरेखा और प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मेले का शुभारंभ कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री को औपचारिक निमंत्रण देने की जिम्मेदारी महंत अवधेश दास को सौंपी गई है। वहीं, समापन समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को आमंत्रित करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
प्रवचन सत्र में दिखेगा नया अंदाज
इस बार रामायण मेले के प्रवचन सत्र को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी है। समिति ने इसके स्वरूप में बदलाव का निर्णय लिया है। प्रवचन कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य की अध्यक्षता में तैयार की जाएगी। इसके जरिए श्रद्धालुओं को रामकथा और आध्यात्मिक संदेश से जोड़ने के साथ कार्यक्रम को अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास होगा।
समय से पहले शुरू होगा प्रचार-प्रसार
बैठक में कार्यक्रम संयोजक आशीष मिश्रा ने आयोजन की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक समय से पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि रामायण मेले के निमंत्रण पत्र और प्रचार सामग्री कार्यक्रम शुरू होने से करीब एक माह पहले ही प्रकाशित करा दी जाए। समिति ने इस सुझाव को महत्वपूर्ण माना, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों को कार्यक्रमों की जानकारी पहले से मिल सके और वे अपनी सहभागिता की योजना बना सकें।
अगली बैठक समिति भवन में कराने का प्रस्ताव
बैठक में समिति के नए कोषाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। साथ ही अगली बैठक रामायण मेला समिति के अपने भवन में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। पदाधिकारियों ने कहा कि रामायण मेला अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। हर वर्ष इसे पहले से अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बार भी धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आध्यात्मिक कार्यक्रमों को बेहतर स्वरूप देने की तैयारी है।






















