बाराबंकी। हेतमापुर में घाघरा-सरयू नदी का कटान लगातार गंभीर होता जा रहा है। बाढ़ के बीच तेज हुई कटान ने गांव की आबादी के साथ सरकारी भवनों और धार्मिक स्थलों के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। देर रात तेज कटान के चलते एक्सचेंज बिल्डिंग देखते ही देखते नदी में समा गई। इससे पहले हनुमान मंदिर भी नदी की धारा में विलीन हो चुका है। लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। अब नदी का कटान हेतमापुर स्थित बाबा नारायण दास मंदिर की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी की धारा मंदिर से कुछ ही मीटर की दूरी तक पहुंच गई है। किनारे तेजी से कटने के कारण मंदिर के साथ आसपास के घरों पर भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण लगातार नदी के बदलते रुख पर नजर रख रहे हैं।
कई घर कटान की जद में
घाघरा नदी का कटान अब आबादी के काफी करीब पहुंच चुका है। राजू, मैकूलाल, रुखशाना, श्यामू, संतोष, उत्तम लोटन, अर्चना गुप्ता, रघुवाई, शब्बीर, द्वारिका, कल्लू प्रधान और अलीम समेत कई ग्रामीणों के मकान खतरे की चपेट में हैं। स्थिति बिगड़ती देख कई परिवार अपने स्तर पर घरों को खाली करने में जुट गए हैं। लोग मकानों को खुद तोड़कर ईंट, दरवाजे, खिड़कियां, टीन शेड और अन्य जरूरी सामान सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहे हैं। जिन घरों को लोगों ने वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से बनाया था, उन्हें अपनी आंखों के सामने टूटता देख ग्रामीणों में मायूसी है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने लिया जायजा
बाढ़ और कटान की जानकारी मिलने के बाद भाजपा एमएलसी अंगद सिंह, जिलाध्यक्ष राम सिंह भुल्लन, पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष शेखर हयारण हेतमापुर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत की। वहीं, एसडीएम आकांक्षा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह ने भी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और प्रभावित परिवारों को राहत किट वितरित की। प्रशासन की ओर से लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया।
नदी के किनारे जाने पर रोक
कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही हैं। ग्रामीणों को खतरे वाले स्थानों से दूर रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। इसके बावजूद कुछ लोग नदी के कटान वाले हिस्सों के पास पहुंचकर फोटो, वीडियो और रील बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कटान की रफ्तार को रोकना और बाबा नारायण दास मंदिर के साथ आसपास की आबादी को नदी की चपेट में आने से बचाना है। लगातार बढ़ते खतरे के बीच ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।





















