लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित वादों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शासकीय कार्यों में लापरवाही और उदासीनता के चलते प्रदेश के पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की कार्रवाई हरदोई, देवरिया, जौनपुर, गाजीपुर और प्रतापगढ़ में तैनात तहसीलदारों के खिलाफ की गई है। अधिकारियों पर राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में अपेक्षित तेजी नहीं लाने और सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप है।
29 अगस्त को सीएम योगी ने की थी समीक्षा
राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान लंबित मामलों की स्थिति, उनके निस्तारण की प्रगति और अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा की गई थी। समीक्षा के बाद जिन अधिकारियों के काम में अपेक्षित सुधार या प्रगति नहीं मिली, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
13 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को नोटिस
पांच तहसीलदारों के निलंबन के अलावा 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार की इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर शासन अब किसी तरह की लापरवाही स्वीकार करने के मूड में नहीं है। अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से मामलों के निस्तारण और शासकीय कार्यों में पूरी गंभीरता बरतने की अपेक्षा की जा रही है।





















