फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की जांच और FIR की मांग; 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO में चिह्नित
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद बढ़ गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे। उन्होंने SIR के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
शिवकुमार का आरोप है कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पहले से भरे हुए फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि इन फॉर्म में मतदाताओं के नाम, पते और EPIC नंबर पहले से दर्ज थे। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
1.08 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट सूची में नहीं
कर्नाटक में SIR के तहत 16 जून 2026 को 5,54,32,314 मतदाता दर्ज थे। 24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 4,46,35,975 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए। करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को ASDDO श्रेणी में रखा गया। इसमें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, पहले से दर्ज और अन्य श्रेणियां शामिल हैं।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ASDDO में रखे गए नामों को अंतिम रूप से हटाया जाना अलग प्रक्रिया का विषय है। प्रभावित मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है। सितंबर में इस प्रक्रिया के दौरान छह लाख से अधिक लोगों ने नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया था।
फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप
शिवकुमार ने विजयपुरा, भालकी, बेलगावी, मैसूरु, मुदिगेरे और बेंगलुरु सहित कई क्षेत्रों में फॉर्म-7 के कथित बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन जमा किए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार ने कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पहले से भरे फॉर्म-7 जमा किए जाने की शिकायत की है और पूरे मामले की जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी का निर्धारण अभी होना बाकी है।
भालकी में 3,244 फॉर्म जमा करने का दावा
कर्नाटक सरकार के मंत्री ईश्वर खंड्रे ने भालकी में एक दिन में 36 लोगों द्वारा 3,244 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ आवेदन ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने के लिए थे, जिन्होंने बाद में पुलिस से शिकायत की।
इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
43.81 लाख मतदाताओं को नोटिस
ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल 43.81 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां या मैपिंग से जुड़ी समस्याएं चिह्नित की गई हैं। इन मामलों में नोटिस और सत्यापन की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। अंतिम मतदाता सूची में दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद बदलाव हो सकते हैं।
SIR को लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से पारदर्शिता और पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि चुनाव अधिकारियों ने कहा है कि ASDDO श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर उपलब्ध है।





















