सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार किया, कलकत्ता हाईकोर्ट को सुनवाई तेज करने का निर्देश
नई दिल्ली/कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चार बैंक खातों को संचालित करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। ये खाते पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के बाद डेबिट ट्रांजेक्शन के लिए फ्रीज हैं और इनमें करीब 804 करोड़ रुपये जमा होने की बात अदालत के सामने रखी गई।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें चारों खातों को संचालित करने की अनुमति नहीं दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के व्यापक पहलू अभी हाईकोर्ट के सामने लंबित हैं और सुनवाई में तेजी लाई जानी चाहिए।
चुनाव चिह्न और पार्टी फंड को लेकर विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी ध्यान में रखा कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर निर्वाचन आयोग के सामने विवाद लंबित है। अदालत के अनुसार, जब यह सवाल लंबित है कि पार्टी की ओर से खातों में मौजूद रकम पर किस गुट का अधिकार है, तब इस स्तर पर खातों के संचालन की अनुमति देना उचित नहीं होगा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर फैसला नहीं कर रही है और संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर रही है। साथ ही हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया गया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को राहत से किया था इनकार
इससे पहले 27 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने चार खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। TMC की ओर से दलील दी गई थी कि पुलिस द्वारा खातों को फ्रीज करने के आधार वाली FIR में प्रक्रियागत कमियां हैं।
हाईकोर्ट ने कहा था कि इससे पहले दिए गए आदेश में पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए व्यवस्था की जा चुकी है। ऐसे में चार अन्य खातों को पूरी तरह संचालित करने की अनुमति देने से उसके पूर्व आदेश पर असर पड़ सकता है।
TMC ने कहा- पार्टी का कामकाज प्रभावित
सुप्रीम कोर्ट में TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि खातों के फ्रीज होने से पार्टी का रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि पार्टी को अपने संचालन और खर्चों के लिए बड़ी मासिक राशि की जरूरत होती है।
दूसरी ओर, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पार्टी के भीतर गुटीय विवाद है और यह भी जांच का विषय है कि खातों में मौजूद धन पर किस पक्ष का अधिकार है। उन्होंने जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेनदेन से संबंधित आरोपों का भी उल्लेख किया।
बैंक खातों की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी
चारों खातों को पश्चिम बंगाल पुलिस की जांच के सिलसिले में डेबिट-फ्रीज किया गया था। TMC ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि खातों को फ्रीज करने के लिए इस्तेमाल की गई FIR में प्रक्रियागत खामियां हैं। पुलिस की साइबर क्राइम जांच से जुड़ी रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के सामने रखी गई थी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चारों खातों पर लगी रोक जारी है। मामले की आगे की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही में तेजी लाने को कहा है।





















