डिजिटल हेल्थ और मरीजों की सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार की पहल पर स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर (एसएचएसआरसी-यूपी) अगले पांच वर्षों के लिए एक व्यापक रणनीतिक रोडमैप तैयार कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर उपचार, सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक तकनीक आधारित सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इसी उद्देश्य से गुरुवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) की ओर से सुशांत गोल्फ सिटी स्थित एक होटल में दो दिवसीय राउंडटेबल बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, चिकित्सा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों ने भाग लेकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की।
प्रस्तावित रोडमैप में डिजिटल हेल्थ सेवाओं का विस्तार, मरीजों की सुरक्षा के लिए मानकों को और मजबूत बनाना, गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर की रोकथाम, अस्पतालों में गुणवत्ता सुधार तथा वैज्ञानिक शोध और साक्ष्यों के आधार पर स्वास्थ्य नीतियों का निर्माण प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और चिकित्सा सेवाओं की नियमित निगरानी के लिए भी ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।
एसएचएसआरसी-यूपी के सह-अध्यक्ष डॉ. आर.के. धीमन ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार, चिकित्सा संस्थानों, शोध संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय बेहद आवश्यक है। सभी संबंधित संस्थाओं की साझा भागीदारी से ही ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जो बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
एसएचएसआरसी-यूपी के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इस केंद्र को उत्तर प्रदेश के प्रमुख तकनीकी थिंक टैंक के रूप में विकसित किया जाएगा। यह संस्थान स्वास्थ्य नीति निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित नीति निर्माण से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा।
बैठक में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ के निदेशक डॉ. एम.पी. गुप्ता, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल, सचिव ऋतु माहेश्वरी, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. साइरस इंजीनियर सहित देश-विदेश के कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा किए। विशेषज्ञों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, डिजिटल तकनीकों के बेहतर उपयोग और अस्पतालों में गुणवत्ता मानकों को और सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया।
आयोजन सचिव डॉ. गौरव झा ने बताया कि दो दिवसीय मंथन के दौरान प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पांच वर्षीय रणनीतिक रोडमैप को अंतिम रूप दिया जाएगा। उम्मीद है कि इस रोडमैप के लागू होने से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा और मरीजों को अधिक सुरक्षित, आधुनिक तथा सुलभ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।







