नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) को नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटना के लिए केवल इमारत के मालिक को जिम्मेदार बताकर सरकारी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकतीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने हादसे को बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कोर्ट ने राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने पर जोर देते हुए कहा कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
छात्रों की सुरक्षा पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अदालत ने पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली से बाहर के हैं और राजधानी में पढ़ाई के दौरान उन्हें रहने के लिए पीजी या हॉस्टल का सहारा लेना पड़ता है। सुनवाई में यह भी टिप्पणी की गई कि दिल्ली विश्वविद्यालय में उपलब्ध हॉस्टल की संख्या जरूरत के मुकाबले कम होने के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी में रहना पड़ता है। ऐसे में इन इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों की निगरानी बेहद जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी भवन को सीमित मंजिलों के निर्माण की अनुमति मिली है और बाद में नियमों को दरकिनार कर उसमें कई अतिरिक्त मंजिलें बना दी जाती हैं, तो यह गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। सरकारी विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भवन निर्माण से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
एक सप्ताह में पीजी और हॉस्टल का ऑडिट
दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को राजधानी में संचालित पीजी और हॉस्टल का एक सप्ताह के भीतर ऑडिट करने का निर्देश दिया है। निगम को यह जानकारी भी देनी होगी कि पीजी के संचालन को लेकर मौजूदा नियम क्या हैं और इन जगहों पर कितने छात्र रह रहे हैं। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भी जानकारी मांगी है कि विश्वविद्यालय में दिल्ली से बाहर के कितने छात्र अध्ययनरत हैं और उनके लिए कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं। कोर्ट ने संबंधित विभागों को यह भी जांचने के लिए कहा है कि जिन भवनों में छात्र रह रहे हैं, उन्हें आवश्यक अनुमति और स्वीकृतियां मिली थीं या नहीं। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की जानकारी भी अदालत के सामने रखनी होगी।
MCD और पुलिस ने बताया, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
सुनवाई के दौरान MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि राहत एवं बचाव अभियान में सभी जरूरी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट ने अधिकारियों के जवाब को रिकॉर्ड पर लिया और रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी बनाए रखने की बात कही। अदालत ने संबंधित पक्षों से अलग-अलग जवाब मांगा है। मामले में 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित सरकारी एजेंसियों की भी जिम्मेदारी है।
हादसे में सात लोगों की मौत
गौरतलब है कि रविवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। बताया जा रहा है कि घटना के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। अब तक सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इमारत के ऊपरी हिस्से में पीजी संचालित होने के कारण वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। राहतकर्मी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
राजस्थान से पकड़ा गया बिल्डिंग मालिक
हादसे के बाद से बिल्डिंग मालिक हरिराम के बारे में पुलिस को तलाश थी। पुलिस के मुताबिक, उसे राजस्थान के भिवाड़ी से हिरासत में लिया गया है। अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में निर्माण और मरम्मत से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
पांच MCD अधिकारियों पर कार्रवाई
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। निलंबित अधिकारियों में साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में अदालत की निगरानी, पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इमारत गिरने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई थी या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।





















