नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और विपक्ष व प्रदर्शनकारियों के बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके अपने इस्तीफे की जानकारी दी और बताया कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से वे काफी दुःखी हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत मान-सम्मान का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
पत्र में बताया परीक्षा सुधारों और CBI जांच का फैसला
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि वे 40 से ज्यादा सालों से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। नीट-यूजी में गड़बड़ी की बात सामने आते ही सरकार ने तुरंत एक्शन लिया और जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी। साथ ही, व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगले साल से NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर के जरिए (CBT मोड में) कराई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को हमेशा के लिए रोका जा सके।
20 लाख छात्रों के भविष्य और नतीजों पर दी सफाई
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता 20 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना और परीक्षा को साफ-सुथरे तरीके से कराना था। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की मदद से परीक्षा पूरी कराई गई और 16 जुलाई को आए नतीजे बेहतर रहे, जिसमें गरीब और मेहनती बच्चों को सफलता मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही दिन से इस पूरी बात की जिम्मेदारी ली थी और वे किसी भी कीमत पर परीक्षा माफिया की वजह से किसी बच्चे का करियर बर्बाद नहीं होने देना चाहते थे।
इस्तीफे की वजह: ‘देश विरोधी ताकतें न उठाएं इस माहौल का फायदा’
अपने इस्तीफे का मुख्य कारण बताते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और देश के माहौल का फायदा कोई देश विरोधी ताकत न उठा पाए, इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाया है। वे चाहते हैं कि देश में शांति बनी रहे और छात्र कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि देश की सेवा, ओडिशा की जनता और युवाओं का हित हमेशा उनके लिए सबसे ऊपर रहेगा।







