अमृत उजाला
तेहरान | मध्य पूर्व में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने बहरीन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। हमले के बाद राजधानी मनामा सहित कई इलाकों में देर रात तक धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। कई स्थानों पर आग लगने की भी खबरें सामने आईं, जिसके बाद पूरे देश में दहशत का माहौल बन गया।
Air Defence Systems हुए एक्टिव
हमले के तुरंत बाद बहरीन के Air Defence Systems सक्रिय कर दिए गए। आसमान में कई ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की कोशिश की गई। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया।
सरकार ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
स्थिति को देखते हुए बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि वे घबराएं नहीं, लेकिन तुरंत सुरक्षित स्थानों और शेल्टर में चले जाएं। कई इलाकों में सायरन बजाए गए और आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया।
क्यों बना बहरीन निशाना?
बहरीन को खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका का प्रमुख सहयोगी माना जाता है। यहां अमेरिकी नौसेना का Fifth Fleet तैनात है और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर बहरीन भी संभावित निशानों में शामिल माना जाता रहा है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव
हमले से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। इसके बाद बहरीन पर हुए हमले ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है।
पूरे खाड़ी क्षेत्र की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर केवल ईरान और बहरीन तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल बहरीन की सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।






