Amrit Ujala
लखनऊ। राजधानी के परिवर्तन चौक से शुक्रवार शाम NEET पेपर लीक, शिक्षा एवं रोजगार के संकट और छात्रों पर कथित दमन के विरोध में छात्रों और युवाओं ने विशाल “प्रतिरोध मार्च” निकाला। मार्च परिवर्तन चौक से शहीद स्मारक तक पहुंचा, जहां संविधान, शिक्षा के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लेते हुए राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजकों के अनुसार, यह मार्च Gen Z और Civil Society के आह्वान पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए। आयोजकों का दावा है कि यह मार्च उन 20 छात्रों की स्मृति को समर्पित था, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर लीक की घटनाओं से जुड़े तनाव के बीच आत्महत्या की, साथ ही दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में भी आयोजित किया गया।
मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश का युवा लगातार पेपर लीक, भर्ती घोटालों, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
आंदोलन के दौरान आयोजकों ने पांच प्रमुख मांगें रखीं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग।
केंद्र और उत्तर प्रदेश में हुए सभी पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई।
छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और दिल्ली लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा और न्याय।
लखनऊ विश्वविद्यालय समेत सभी शिक्षण संस्थानों में फीस वृद्धि वापस लेने तथा निष्कासित छात्रों की बहाली।
आयोजकों ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक संगठन या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के हर छात्र और युवा के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उनका कहना था कि शिक्षा को अधिकार और रोजगार को युवाओं का हक सुनिश्चित कराने तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन में समाजवादी महिला सभा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह सहित विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम के संयोजक एवं छात्र नेता डॉ. सुधांशु बाजपेई ने कहा कि यह एक ओपन कॉल थी, जिसमें आम छात्र, युवा, नागरिक और विभिन्न संगठनों के स्टूडेंट विंग शामिल हुए। उन्होंने अपील की कि इस पहल को किसी राजनीतिक दल से जोड़कर न देखा जाए, बल्कि इसे Civil Society और Gen Z Initiative के रूप में देखा जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों पर यह आंदोलन आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
आयोजन समिति में डॉ. सुधांशु बाजपेई, महेंद्र यादव, अहमद रजा, अंकित गुप्ता, समर गौतम, ज्योति राय, अनिल यादव, विशाल सिंह और क्रांति कुमार सिंह शामिल रहे। वहीं प्रतिरोध मार्च में महेंद्र कुमार यादव, शांतम निधि, प्रदीप शर्मा, अब्दुल वहाब, दीपक कबीर, प्रिंस प्रकाश समेत बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए।




















