लखनऊ, 23 जुलाई 2026।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के भवनों को ध्वस्त किए जाने के मुद्दे पर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा, विद्यार्थियों के भविष्य और संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा के लिए संतुलित समाधान आवश्यक है।
अजय राय ने पत्र में कहा कि शिक्षा और जनकल्याण के उद्देश्य से स्थापित विश्वविद्यालय किसी सरकार, राजनीतिक दल या व्यक्ति की संपत्ति नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्र की बौद्धिक पूंजी और समाज की साझा धरोहर हैं। सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन शिक्षा संस्थानों की गरिमा और उपयोगिता बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30(1) अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और संचालन का अधिकार देता है। ऐसे में यदि भवन निर्माण संबंधी कोई विवाद था, तो उसका समाधान विधिक प्रक्रिया और नियमितीकरण के माध्यम से किया जा सकता था। व्यापक स्तर पर भवनों को ध्वस्त करने का निर्णय न्याय और प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2013 से संचालित इस विश्वविद्यालय में हजारों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे किसी भी निर्णय में विद्यार्थियों की शिक्षा, उनके भविष्य और कर्मचारियों की आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आज जो प्रशासनिक मानक स्थापित होंगे, वही भविष्य की कार्यप्रणाली का आधार बनेंगे। इसलिए शिक्षा संस्थानों से जुड़े मामलों में ऐसा दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जिससे विधि का शासन भी मजबूत हो और संस्थागत स्थिरता तथा जनविश्वास भी बना रहे।
अजय राय ने पत्र में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के शिक्षा संबंधी योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में उच्च शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और शिक्षाविद् मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का संरक्षण स्वतंत्रता संग्राम की विरासत के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है।
पत्र के अंत में अजय राय ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए राज्य सरकार को ऐसे निर्देश दें, जिससे विधि का शासन कायम रहे, विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे और विश्वविद्यालय के भवनों के नियमितीकरण सहित अन्य वैधानिक उपायों को प्राथमिकता मिले।




















