मास्टरमाइंड समेत चार गिरफ्तार
विदेशी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना, पुलिस ने 31 लैपटॉप और लाखों रुपये किए बरामद
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र में संचालित फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर के मामले में जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशों, विशेषकर अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाता था। इस मामले में पुलिस पहले ही मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में कॉल सेंटर के तकनीकी नेटवर्क, कॉलिंग सिस्टम और साइबर ठगी के तरीके सामने आए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग तकनीक (VoIP) का उपयोग करता था, जिससे विदेशी नंबरों से कॉल होने का आभास कराया जाता था। आरोपी खुद को सरकारी एजेंसियों या तकनीकी सहायता देने वाली संस्थाओं का अधिकारी बताकर लोगों को डराते और फिर उनसे धनराशि ऐंठने की कोशिश करते थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 31 लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, नेटवर्किंग उपकरण और करीब 18.5 लाख रुपये नकद बरामद किए। बरामद डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि गिरोह के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या विदेशों तक जुड़े हैं या नहीं। पुलिस का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या ऑनलाइन संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। यदि कोई व्यक्ति सरकारी एजेंसी का नाम लेकर धन की मांग करता है या डराने-धमकाने का प्रयास करता है, तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।







