, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
गौ रक्षा वाहिनी ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, मंदिर के स्वरूप में बदलाव और निर्माण प्रक्रिया पर उठाए सवाल; प्रशासनिक जांच का इंतजार
सुल्तानपुर। शहर के ठठेरी बाजार स्थित प्राचीन ठाकुर जी (राधाकृष्ण) मंदिर परिसर में प्रस्तावित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं, नागरिकों और सामाजिक संगठनों की ओर से मंदिर के मूल स्वरूप में परिवर्तन किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी क्रम में गौ रक्षा वाहिनी ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
गौ रक्षा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि किसी मंदिर में स्थापित भगवान के विग्रह को हटाकर अथवा अनुपयुक्त स्थान पर रखकर व्यावसायिक निर्माण कराया जा रहा है, तो यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ सार्वजनिक व्यवस्था और विधिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप या उपयोग में परिवर्तन संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुरूप ही होना चाहिए।
निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि मंदिर परिसर में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना के तहत बिल्डर से समझौता किया गया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण की तैयारी के दौरान मंदिर में स्थापित विग्रह को उनके मूल स्थान से हटाया गया। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।
इसी प्रकार, कुछ सूत्रों के हवाले से निर्माण कार्य में कुछ व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
नियमों के पालन पर उठे सवाल
गौ रक्षा वाहिनी ने कहा कि यदि मंदिर सार्वजनिक ट्रस्ट, धार्मिक न्यास या दान स्वरूप प्राप्त संपत्ति है, तो उसके उपयोग, निर्माण या स्वरूप में परिवर्तन के लिए संबंधित कानूनों, भवन निर्माण नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक हो सकती है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
प्रशासन से की गई ये मांगें
गौ रक्षा वाहिनी ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए—
- निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
- मंदिर की संपत्ति का स्वामित्व एवं प्रबंधन किसके पास है।
- मंदिर के विग्रह अथवा परिसर के स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किया गया या नहीं।
प्रशासनिक जांच का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं तथा आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।







