लखनऊ के संस्थान ने विकसित की नई तकनीक
लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने ऐसी नई जांच तकनीक विकसित की है, जिससे 10 मिनट से भी कम समय में कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों से जुड़े 45 खतरनाक रसायनों की बेहद सूक्ष्म मात्रा का पता लगाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. डी.के. पटेल और उनकी टीम ने एक वैश्विक कंपनी के सहयोग से यह तकनीक विकसित की है। इसके माध्यम से भोजन, पीने के पानी और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं में मौजूद खतरनाक रसायनों की बहुत कम मात्रा की भी सटीक पहचान की जा सकेगी।
ये रसायन नॉन-स्टिक बर्तनों, प्लास्टिक की बोतलों, खाने की पैकिंग, पिज्जा के डिब्बों, सौंदर्य प्रसाधनों, कपड़ों, रंग और आग बुझाने वाले फोम समेत अनेक उत्पादों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ये आसानी से नष्ट नहीं होते, इसलिए लंबे समय तक पर्यावरण और मानव शरीर में बने रहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इनसे कैंसर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पेयजल, प्लास्टिक की बोतलों, खाने की पैकिंग और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के माध्यम से ये रसायन शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में इनकी समय रहते पहचान बेहद आवश्यक है।
संस्थान ने पीने के पानी से इन रसायनों को हटाने की नई तकनीक भी विकसित की है। इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए एक कंपनी को उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे भविष्य में लोगों को अधिक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
संस्थान के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के सहयोग से भारत में उपभोक्ता वस्तुओं में इन रसायनों की मौजूदगी, उनके उत्पादन, आयात, निर्यात और उपयोग का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में इनके लिए राष्ट्रीय मानक और नियम तैयार करने में मदद मिलेगी।
वर्ष 1965 में लखनऊ में स्थापित भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं में शामिल है। यह संस्थान औद्योगिक और पर्यावरणीय रसायनों के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, खाद्य सुरक्षा तथा जल और मिट्टी के प्रदूषण से जुड़े विषयों पर लंबे समय से शोध कर रहा है।
10 मिनट में पता चलेंगे खतरनाक रसायन








