ठेके पर बनी योजना सवालों के घेरे में, सड़कें खोदकर छोड़ी गईं
गोरखपुर। जंगल कौड़िया विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम बलुआ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना की जमीनी हकीकत गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जहां योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, वहीं गांव में स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा पाइपलाइन बिछाने का कार्य तो पूरा दिखाया गया, लेकिन कई जगह पाइप आपस में जोड़े ही नहीं गए। परिणामस्वरूप जलापूर्ति शुरू होते ही जगह-जगह पानी का रिसाव होने लगा और सप्लाई ठप पड़ गई।
जांच के दौरान खुला बड़ा लापरवाही का मामला
ग्रामीणों की शिकायत पर जब तकनीकी स्तर पर जांच की गई तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कई स्थानों पर पाइपलाइन को सही ढंग से कनेक्ट ही नहीं किया गया था। इसके बाद मरम्मत के नाम पर सड़कों की खुदाई शुरू कर दी गई, जिससे गांव की हालात और खराब हो गई।
नवनिर्मित रास्ते जगह-जगह खोदे जाने से आवागमन बाधित हो गया है और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। कई हिस्सों में काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का आरोप: सिर्फ कागजों में पूरा हुआ काम
ग्रामीणों का कहना है कि योजना सिर्फ कागजों पर पूरी दिखाई जा रही है, जबकि धरातल पर स्थिति पूरी तरह अलग है। पाइपलाइन में गंदगी और खुली खुदाई को लेकर लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी खतरे की भी आशंका जताई है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी जगदीश सिंह ने कहा कि “अब तक न तो टोटी लगी है और न ही घरों में पानी पहुंचा है। बार-बार सड़क खोदकर छोड़ दिया जाता है, जिससे समस्या और बढ़ रही है।”
वहीं अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि “जहां भी देखो वहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। कई दिन तक काम अधूरा छोड़ दिया जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।”
विभागीय पक्ष
कार्यदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड के जेई राजीव पांडेय ने बताया कि कुछ टोलों में पानी नहीं पहुंच पा रहा था, इसलिए लाइन जोड़ने के लिए खुदाई की जा रही है ताकि सप्लाई सुचारू की जा सके।
उधर, विभागीय अधिकारी सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जहां भी खुदाई की गई है, उसे ठीक कराना अनिवार्य है। निर्देश दिए जाएंगे और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
बलुआ गांव में हर घर जल योजना की स्थिति फिलहाल गंभीर सवालों के घेरे में है। अधूरी पाइपलाइन, खोदी गई सड़कें और ठप जलापूर्ति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर क्या ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह योजना भी केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।






