बाराबंकी। नगर पंचायत रामसनेहीघाट की सफाई व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। वार्ड संख्या तीन के ठठरहा गांव से जेठबनी जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे स्थित मंदिर के सामने नियमित रूप से कूड़ा डंप किए जाने और उसे खुले में जलाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। धुएं और दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है, जबकि राहगीरों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पंचायत सड़क किनारे खाली पड़े एक प्लॉट को अस्थायी डंपिंग स्थल के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यहां डाला जाने वाला कूड़ा अक्सर सड़क तक फैल जाता है, जिससे मार्ग संकरा हो जाता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। वहीं कूड़ा जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
नगर पंचायत रामसनेहीघाट के अंतर्गत 14 वार्डों में लगभग 25 हजार की आबादी निवास करती है। सफाई व्यवस्था के लिए 53 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है, जिन्हें कूड़ा संग्रहण और निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में गंदगी और कूड़े के ढेर सफाई व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीण रामसागर पाल, छोटू पाल, आनंद, उत्तम, अंकित, ललित, रमेश रावत और राम कैलाश ने बताया कि कूड़े की दुर्गंध पूरे गांव में फैल रही है। उनका कहना है कि इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है और लोगों का इस मार्ग से गुजरना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि नगर पंचायत का अधिकृत कूड़ा निस्तारण केंद्र रामसनेहीघाट से करीब 10 किलोमीटर दूर सनौली ग्राम पंचायत के करौंधिया गांव में स्थित है, लेकिन अधिकांश कूड़ा वहां भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही डंप किया जा रहा है। इससे समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
इस संबंध में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार चौधरी ने बताया कि फिलहाल नगर पंचायत के पास कोई स्थायी डंपिंग स्थल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कूड़ा हटवाया जाता है तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।








