अमृत उजाला
नई दिल्ली/लखनऊ | 22 जुलाई 2026
NEET-UG (National Eligibility cum Entrance Test – Undergraduate) पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार (Education System Reforms) और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी है। वहीं उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संसद (Parliament) से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सियासी संग्राम तेज हो गया है।
रातभर में क्या-क्या हुआ?
मंगलवार को दिल्ली में आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। इसके बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता Prime Minister Residence (PM House) की ओर मार्च करते हुए धरने पर बैठे। दिल्ली पुलिस ने सभी नेताओं को हिरासत (Detention) में लिया, हालांकि कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
उधर, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा (Violence) और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अब तक 5 FIR (First Information Report) दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
मीडिया से अभद्रता और हमले की भी खबरें
प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों (Journalists) और मीडिया कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की तथा कैमरों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की भी खबरें सामने आई हैं। कुछ मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया कि कवरेज के दौरान उनके रिपोर्टरों और कैमरापर्सन के साथ बदसलूकी की गई। इन घटनाओं को लेकर भी चर्चा तेज है, हालांकि सभी मामलों में आधिकारिक जांच और पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।
संसद में भी गूंजा मुद्दा
Monsoon Session के तीसरे दिन भी यह मुद्दा संसद में छाया रहने की संभावना है। AAP (Aam Aadmi Party) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने Suspension of Business Notice देकर NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की कथित विफलता, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर तत्काल चर्चा की मांग की है।विपक्ष का कहना है कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के निर्देश के बाद Safdarjung Hospital से गुरुग्राम के Medanta Hospital में स्थानांतरित किया गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की। बताया गया कि उनका अनशन (Hunger Strike) जारी है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
उत्तर प्रदेश में भी सड़कों पर उतरा विपक्ष
दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी आंदोलन का असर साफ दिखाई दिया।लखनऊ में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।इसके अलावा चंदौली, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी (बनारस) सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने NEET-UG Paper Leak की निष्पक्ष जांच, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
कई राज्यों में बढ़ रहा आंदोलन
उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में भी छात्रों, युवा संगठनों और विपक्षी दलों ने रैलियां, धरने और प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर जिला प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी और अधिकारियों को ज्ञापन (Memorandum) सौंपे गए।
CJP का ऐलान
Cockroach Janata Party (CJP) ने साफ कहा है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का दावा है कि पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन कमजोर नहीं बल्कि और व्यापक हुआ है तथा आने वाले दिनों में देशभर से अधिक संख्या में छात्र दिल्ली पहुंचेंगे।
आज क्यों अहम है?
आज संसद में विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा या पेपर लीक का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक बहस (National Political Debate) का केंद्र बन चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार आंदोलनकारी छात्रों और विपक्ष की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या बातचीत (Dialogue) से कोई समाधान निकलता है।







