असली प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण महासचिव के पास; नए नाम पर अभी भी मंथन जारी
अयोध्या/लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन ट्रस्ट की नियमावली के अनुसार इस पद के गठन के बावजूद वास्तविक प्रशासनिक, वित्तीय और नीतिगत अधिकार महासचिव के पास ही केंद्रित रहेंगे। ट्रस्ट के भीतर CEO की भूमिका पेशेवर प्रशासक की होगी, जबकि अंतिम निर्णय लेने की शक्ति महासचिव के पास रहेगी।
हाल ही में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से CEO नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, ट्रस्ट के नियम स्पष्ट करते हैं कि CEO स्वतंत्र रूप से कोई बड़ा नीतिगत या वित्तीय निर्णय नहीं ले सकेगा। उसे अपने सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों और कार्यों की जानकारी महासचिव को देनी होगी तथा उसकी कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा भी महासचिव करेंगे।
महासचिव के पास रहेंगे सबसे महत्वपूर्ण अधिकार
ट्रस्ट की नियमावली के अनुसार महासचिव ट्रस्ट का सर्वोच्च कार्यकारी पदाधिकारी होता है। मंदिर की संपत्तियों, बैंक खातों, कानूनी दस्तावेजों और वित्तीय निवेशों पर अंतिम नियंत्रण उसी के पास रहेगा। मंदिर के विस्तार, बड़े निर्माण कार्यों, धार्मिक आयोजनों, विकास योजनाओं तथा अन्य नीतिगत मामलों में अंतिम निर्णय महासचिव ही लेंगे।
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार, न्यायालय तथा अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के समक्ष ट्रस्ट का आधिकारिक प्रतिनिधित्व भी महासचिव करेंगे। ट्रस्ट के वार्षिक बजट को मंजूरी देना, CEO के कार्यों की समीक्षा करना और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी करना भी उन्हीं की जिम्मेदारी होगी।
CEO संभालेंगे मंदिर का दैनिक संचालन
मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मंदिर के दैनिक प्रशासन तक सीमित रहेगी। श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन, स्वच्छता, वीआईपी मूवमेंट, कर्मचारियों की निगरानी, प्रशासनिक समन्वय, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ तालमेल, ट्रस्ट द्वारा स्वीकृत बजट के अनुरूप खर्च तथा आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना CEO की जिम्मेदारी होगी।
त्योहारों, विशेष आयोजनों और भीड़भाड़ वाले अवसरों पर श्रद्धालुओं के सुचारु आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी CEO के प्रमुख दायित्वों में शामिल रहेगा।
CEO के कार्यों की होगी नियमित समीक्षा
ट्रस्ट की व्यवस्था के अनुसार CEO को समय-समय पर अपनी कार्य रिपोर्ट महासचिव को प्रस्तुत करनी होगी। प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा भी महासचिव करेंगे। इसका अर्थ है कि CEO पेशेवर प्रशासक के रूप में कार्य करेगा, लेकिन ट्रस्ट की नीतिगत दिशा और अंतिम निर्णयों का अधिकार महासचिव के पास ही रहेगा।
महासचिव के नाम पर अब भी नहीं बन सकी सहमति
22 जुलाई को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में भी नए महासचिव के नाम पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन विभिन्न स्तरों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण फैसला टाल दिया गया।
बताया जा रहा है कि महासचिव का चयन विश्व हिंदू परिषद (VHP) से होगा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े किसी पदाधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, इस पर विचार-विमर्श जारी है। साथ ही यह भी तय होना बाकी है कि अंतिम फैसला दिल्ली स्तर पर होगा या उत्तर प्रदेश नेतृत्व की राय को प्राथमिकता दी जाएगी।
डॉ. कृष्ण मोहन और बजरंग लाल बागड़ा के नाम चर्चा में
फिलहाल डॉ. कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं। उनका नाम स्थायी महासचिव के लिए प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। वहीं विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी बजरंग लाल बागड़ा का नाम भी चर्चा में है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि महासचिव सहित ट्रस्ट के अन्य रिक्त पदों पर नियुक्ति में अभी कुछ और सप्ताह लग सकते हैं। इसके बाद ही CEO की नियुक्ति और नई प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।






