एडीजे कोर्ट का बड़ा फैसला
गोरखपुर। शाहपुर वार्ड संख्या-43 से निर्वाचित भाजपा पार्षद ज्ञानती देवी का निर्वाचन एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने शपथ पत्र में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के आरोपों को आधार मानते हुए चुनाव को अवैध और शून्य घोषित किया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक) सुदेश कुमार की अदालत ने उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 71 (b) एवं 71 (d-i) के तहत पार्षद का नामांकन और निर्वाचन रद्द करने का आदेश दिया।
याचिका में लगाए गए प्रमुख आरोप
यह चुनाव याचिका आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रत्याशी अर्चना शुक्ला ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि भाजपा का चुनाव चिह्न “ज्ञानती देवी पत्नी श्यामलाल” के नाम से जारी हुआ था, जबकि नामांकन पत्र “ज्ञानती देवी पत्नी परशुराम” के नाम से दाखिल किया गया।
इसके अलावा आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मिले आवास की जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी गई। साथ ही करीब 3,000 वर्ग फीट से अधिक की भूमि का विवरण भी छिपाया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि ज्ञानती देवी का नाम देवरिया जिले के बरहज क्षेत्र की मतदाता सूची में भी दर्ज था तथा वर्ष 2021 में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की जानकारी भी नामांकन के दौरान सार्वजनिक नहीं की गई।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
याची अर्चना शुक्ला ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नामांकन के समय से ही उन्होंने साक्ष्यों के साथ शिकायत की थी, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने उस पर कार्रवाई नहीं की। उनके अनुसार, अदालत के फैसले से न्याय मिला है।
वहीं पार्षद पक्ष की ओर से उनके पुत्र राघवेंद्र सिंह ने कहा कि यह केवल तकनीकी त्रुटि का मामला है, जिसे विपक्ष ने अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि ज्ञानती देवी ने 1,723 मतों के अंतर से चुनाव जीता था और इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।





















