एटा: जांच पर भी उठे सवाल
अमृत उजाला न्यूज़ | जलेसर (एटा)
एटा जिले के जलेसर क्षेत्र में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) से जुड़ा एक मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एक महिला ने गांव में अपने वर्तमान (जीवित) पति के नाम पर राशन कार्ड का लाभ लिया, जबकि नगर क्षेत्र में अपने पहले (दिवंगत) पति के नाम पर प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का लाभ प्राप्त कर लिया। साथ ही शिकायतों की जांच में कथित अनियमितता और गलत रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
नोट: इस खबर में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। संबंधित अधिकारियों या महिला की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
जलेसर ब्लॉक की ग्राम पंचायत गोपालपुर के उपग्राम अरबगढ़ निवासी सोनू निगम ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और जिलाधिकारी एटा को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि सुमन देवी की पहली शादी जलेसर नगर के मोहल्ला गोलनगर निवासी कुमरपाल से हुई थी। कुमरपाल की मृत्यु के बाद उन्होंने कथित रूप से ग्राम अरबगढ़ निवासी सूबेदार सिंह से दूसरा विवाह कर लिया और पिछले करीब 20 वर्षों से वहीं रह रही हैं।
शिकायत के अनुसार महिला के राशन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता सूची में वर्तमान पति सूबेदार सिंह का नाम दर्ज है तथा वह ग्राम अरबगढ़ से नियमित रूप से राशन प्राप्त कर रही हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि जुलाई माह का राशन भी महिला द्वारा लिया गया है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे आवास लेने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला ने नगर पालिका परिषद में कार्यरत एक रिश्तेदार की मिलीभगत से आधार कार्ड और अन्य अभिलेखों में कथित रूप से हेरफेर कर पहले पति के नाम और नगर के पते का उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत करा लिया। शिकायतकर्ता ने इसे शासन के नियमों के विपरीत बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
जांच रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल
सोनू निगम का आरोप है कि 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच बिना स्थलीय निरीक्षण के कर दी गई। उनका कहना है कि परियोजना अधिकारी, डूडा द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट में तथ्यों को सही ढंग से शामिल नहीं किया गया और शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट में उनके मोबाइल नंबर को बंद बताया गया, जबकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कॉल डिटेल भी उपलब्ध कराई है।
नगर पालिका की जांच पर भी आपत्ति
शिकायतकर्ता के अनुसार 2 जुलाई 2026 को दर्ज एक अन्य ऑनलाइन शिकायत में भी यही मुद्दा उठाया गया था, लेकिन उसमें भी कथित रूप से वास्तविक तथ्यों की अनदेखी करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उनका कहना है कि महिला के गांव में निवास, राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता सूची और अन्य अभिलेख उपलब्ध होने के बावजूद जांच में इन तथ्यों का समुचित उल्लेख नहीं किया गया।
एसडीएम स्तर से जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी एटा से मांग की है कि पूरे मामले की उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर के अधिकारी से स्थलीय जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका अनियमितता में पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।







