जुलाई को तालकटोरा स्टेडियम में जुटेंगे किसान-मजदूर और कर्मचारी संगठन
लखनऊ। बिजली के निजीकरण, चार श्रम संहिताओं और प्रस्तावित बीज विधेयक के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा तथा 10 अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर 29 जुलाई को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन में केंद्र और राज्यों की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तय किए जाने की संभावना है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) विधेयक-2025, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण, चार श्रम संहिताओं तथा प्रस्तावित बीज विधेयक पर विस्तार से चर्चा होगी। इन मुद्दों के विरोध में आगे की संयुक्त कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।
समिति के अनुसार, 12 फरवरी 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा और 10 राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल हुई थी, लेकिन उसके बाद भी सरकारों की नीतियों में बदलाव नहीं हुआ। उलटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बिजली निजीकरण की प्रक्रिया और तेज कर दी गई है, जिससे बिजली कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।
समिति ने कहा कि यदि सम्मेलन में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया जाता है तो देशभर के बिजली कर्मचारी उसमें सक्रिय भागीदारी करेंगे। संघर्ष समिति ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारी पिछले 606 दिनों से आंदोलनरत हैं और इस दौरान हजारों कर्मचारियों को उत्पीड़नात्मक व दंडात्मक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है।
समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ हुए समझौते के अनुरूप मार्च 2023 के आंदोलन और निजीकरण विरोधी आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों पर की गई सभी प्रतिशोधात्मक एवं अनुचित कार्रवाइयों को वापस लिया जाए, ताकि औद्योगिक शांति और सौहार्द का वातावरण स्थापित हो सके।







