लखनऊ- अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन दान करने वाले श्रद्धालुओं को भुगतान पूरा होते ही तत्काल डिजिटल रसीद (ई-रसीद) उपलब्ध कराई जाएगी। श्रद्धालु उसी समय रसीद डाउनलोड कर अपने पास सुरक्षित रख सकेंगे। इससे दान का पूरा रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध रहेगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की जानकारी या सत्यापन में सुविधा होगी।
यह नई व्यवस्था ऐसे समय लागू की गई है, जब हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान व्यवस्था पर व्यापक चर्चा हुई थी। ट्रस्ट लगातार ऐसी व्यवस्थाएं लागू कर रहा है, जिनसे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो तथा दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।
ऑनलाइन दान की प्रक्रिया हुई आसान
ट्रस्ट ने अपनी वेबसाइट के डोनेशन सेक्शन को अपडेट करते हुए ऑनलाइन दान की प्रक्रिया को पहले से अधिक व्यवस्थित बनाया है। ऑनलाइन दान करने के लिए श्रद्धालुओं को अपना नाम, दान का उद्देश्य, पैन नंबर (जहां आवश्यक हो), दान की राशि, दान की तिथि, पूरा पता, राज्य, जिला, देश, पिनकोड, ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। भुगतान सफल होते ही सिस्टम स्वतः डिजिटल रसीद जारी करेगा, जिसे डाउनलोड कर सुरक्षित रखा जा सकेगा।
ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वेबसाइट पर संपर्क मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी उपलब्ध कराई है, ताकि दान से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या, भुगतान संबंधी प्रश्न या रसीद प्राप्त करने में आने वाली कठिनाई का त्वरित समाधान किया जा सके।
ऑफलाइन दान पर भी मिलेगी अनिवार्य रसीद
नई व्यवस्था के तहत केवल ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में नकद या अन्य माध्यम से ऑफलाइन दान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भी अनिवार्य रूप से रसीद उपलब्ध कराई जाएगी। ट्रस्ट का मानना है कि इससे प्रत्येक दान का विधिवत रिकॉर्ड रहेगा और किसी प्रकार की भ्रम या शिकायत की संभावना काफी कम हो जाएगी।
चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद बढ़ी जवाबदेही
सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद अनेक श्रद्धालुओं ने समय पर रसीद उपलब्ध न होने और दान के रिकॉर्ड को लेकर चिंता व्यक्त की थी। इन्हीं सुझावों और शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने डिजिटल रसीद की तत्काल सुविधा शुरू की है। इसके साथ ही ट्रस्ट ने वित्तीय निगरानी और ऑडिट व्यवस्था को भी अधिक मजबूत बनाया है, ताकि दान की प्रत्येक राशि का पारदर्शी ढंग से लेखा-जोखा रखा जा सके।
श्रद्धालुओं का भरोसा फिर हुआ मजबूत
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद कुछ समय के लिए दान की गति प्रभावित हुई थी और कई श्रद्धालु दानपात्रों में नकद दान देने के बजाय रसीद के माध्यम से दान करने को प्राथमिकता देने लगे थे। अब नई पारदर्शी व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रतिदिन 10 लाख रुपये से अधिक का दान प्राप्त हो रहा है। मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नकद दान कर रहे हैं, जबकि डिजिटल माध्यम से दान करने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, ट्रस्ट ने दैनिक दान के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
पारदर्शिता की दिशा में लगातार सुधार
राम मंदिर ट्रस्ट बीते कुछ समय से अपनी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं में लगातार सुधार कर रहा है। डिजिटल रसीद, ऑफलाइन दान पर अनिवार्य रसीद, नियमित ऑडिट और वित्तीय निगरानी जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना तथा दान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। ट्रस्ट का कहना है कि भविष्य में भी तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग कर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।







