औरैया: करंट लगने से दो वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत
अजीतमल (औरैया)। कोतवाली क्षेत्र के रतनीपुर भीखेपुर गांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में खुले बिजली के तार की चपेट में आने से दो वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। घर के कमरे में खिड़की के पास निकले कूलर के कटे हुए तार में प्रवाहित करंट ने खेल रही बच्ची की जान ले ली। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, रतनीपुर भीखेपुर गांव निवासी रोहताश गौतम गाजियाबाद में मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी अर्चना गौतम अपनी दो वर्षीय बेटी नियति और एक माह की दूसरी बेटी के साथ इन दिनों मायके में रह रही थीं।
बताया गया कि रविवार दोपहर घर का कामकाज निपटाने के बाद अर्चना दोनों बेटियों के साथ कमरे में आराम करने चली गईं। इसी दौरान दो वर्षीय नियति कमरे में खेलते-खेलते खिड़की के पास पहुंच गई। खिड़की के सहारे कूलर का बिजली का तार बाहर निकला हुआ था, जिसमें कट लगा होने के कारण करंट प्रवाहित हो रहा था। जैसे ही बच्ची का हाथ खिड़की और तार के संपर्क में आया, वह तेज करंट की चपेट में आ गई।
मासूम की चीख सुनकर दौड़ी मां
बच्ची की चीख सुनते ही अर्चना की नींद खुल गई। उन्होंने तत्काल दौड़कर किसी तरह बच्ची को बिजली के तार से अलग किया। इसके बाद परिजन गंभीर हालत में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अजीतमल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देखते हुए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया, लेकिन उपचार के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया।
परिवार में मचा कोहराम
दो वर्षीय नियति की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस हादसे से स्तब्ध हैं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मासूम की असमय मौत ने सभी को झकझोर दिया।
पुलिस ने शुरू की वैधानिक कार्रवाई
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार राजपूत ने बताया कि करंट लगने से बच्ची की मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
सावधानी ही बचाव
यह हादसा एक बार फिर घरों में खुले या कटे हुए बिजली के तारों से होने वाले खतरे की ओर ध्यान दिलाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कटे हुए बिजली के तारों को तत्काल बदलवाना, अर्थिंग की नियमित जांच कराना और छोटे बच्चों को बिजली के उपकरणों व खुले तारों से दूर रखना ऐसे हादसों को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।







