ग्रेटर नोएडा में सूरजपुर-कासना मार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए जल्द राहत की उम्मीद है। इस सड़क पर लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सड़क की क्षमता बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। नटों की मढ़ैया गोलचक्कर से कासना टी-प्वाइंट के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में नई लेन विकसित की जा रही है। काम पूरा होने के बाद इस मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सुबह-शाम सबसे ज्यादा रहती है वाहनों की भीड़
सूरजपुर-कासना रोड का यह हिस्सा पहले से ही व्यस्त रहता है। करीब 80 मीटर चौड़ी सड़क होने के बावजूद वाहनों की संख्या बढ़ने से कई बार रफ्तार थम जाती है। सुबह दफ्तर और स्कूल जाने के समय तथा शाम को वापसी के वक्त स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। कई बार वाहनों की कतार दूर तक पहुंच जाती है। इसी समस्या को देखते हुए प्राधिकरण ने सड़क में अतिरिक्त लेन जोड़ने का निर्णय लिया है। निर्माण एजेंसी को काम सौंपे जाने के बाद मौके पर कार्य भी शुरू हो गया है।
रोजाना गुजरते हैं बड़ी संख्या में वाहन
यह रास्ता ग्रेटर नोएडा के कई आवासीय इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है। निजी कारों और दोपहिया वाहनों के अलावा यहां मालवाहक वाहन और रोडवेज बसें भी बड़ी संख्या में गुजरती हैं। ग्रेटर नोएडा डिपो से संचालित यूपी रोडवेज की बसों के लिए भी यह प्रमुख मार्ग है। ऐसे में नई लेन बनने के बाद वाहनों को आगे बढ़ने के लिए ज्यादा जगह मिलेगी और ट्रैफिक को व्यवस्थित करने में सहूलियत होगी।
जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद और बढ़ेगा दबाव
सूरजपुर-कासना मार्ग की अहमियत आने वाले दिनों में और बढ़ने वाली है। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, डीएमआईसी इंटीग्रेटेड टाउनशिप और कासना औद्योगिक क्षेत्र के साथ ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाला ट्रैफिक भी इसी रास्ते से गुजरता है। इसके अलावा जेवर में बन रहे नोएडा एयरपोर्ट से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने पर इस मार्ग पर वाहनों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
जाम कम होने के साथ ईंधन की भी बचत
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह ने बताया कि अतिरिक्त लेन तैयार होने से सड़क की क्षमता बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा यातायात की रफ्तार पर पड़ने की उम्मीद है। वाहनों के सुचारु संचालन से लोगों को जाम में कम समय बिताना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय घटने के साथ लंबे समय तक वाहन खड़े रहने से होने वाली ईंधन की बर्बादी भी कम हो सकती है।





















