अयोध्या में संत समाज से जुड़े पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। अलग-अलग संतों के पुराने वीडियो सामने आने के बाद उनके आचरण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में संत वेशधारी कुछ लोगों को महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन वीडियो की सत्यता और उनके संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके बावजूद मामले को लेकर संत समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है।
इस पूरे मामले पर तपसी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य के उत्तराधिकारी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की धार्मिक मर्यादा और संत परंपरा के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों के लिए संत समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संत समाज को बैठक कर उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
महंत एकनाथ महाराज ने कहा कि संत बनना केवल भगवा वस्त्र धारण करने तक सीमित नहीं है। संत जीवन का मूल आधार त्याग, तपस्या, ईश्वर की साधना और समाज सेवा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संत परंपरा का हिस्सा बनने के बजाय इसे अपने निजी हित और स्वार्थ का माध्यम बना रहे हैं। ऐसे लोगों के आचरण से पूरी संत परंपरा की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि संत समाज की पहचान हमेशा भजन, साधना, धार्मिक अनुष्ठान और लोककल्याण के कार्यों से रही है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति संत का वेश धारण कर मर्यादा के विपरीत आचरण करता है तो उसकी वजह से उन संतों की छवि भी प्रभावित होती है, जो पूरी निष्ठा के साथ धर्म और समाज की सेवा में जुटे हुए हैं। महंत ने संत समाज से अपील की कि ऐसे मामलों में मौन रहने के बजाय आगे आकर निष्पक्ष जांच की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संत परंपरा की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और निष्पक्ष जांच के बाद ही की जानी चाहिए।





















