Cyber Fraud Kanpur: कानपुर में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क की जांच कर रही पुलिस के सामने करोड़ों नहीं, बल्कि हजारों करोड़ रुपये के संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन का मामला सामने आया है। साइबर क्राइम टीम ने निवेश के नाम पर लोगों को कथित तौर पर जाल में फंसाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, कानपुर के 14 अलग-अलग बैंकों में खोले गए 72 खातों से करीब 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले हैं। इन बैंक खातों की जानकारी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के रिकॉर्ड से मिलाने पर 86 ऐसी शिकायतों का भी पता चला, जो अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं। इसके बाद पुलिस ने बैंकिंग ट्रेल की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
दो आरोपी गिरफ्तार, 65 लाख से ज्यादा कैश बरामद
पुलिस ने इस मामले में कानपुर के रहने वाले शाहजेब वारिस और सलमान को पकड़ा है। दोनों के पास से 65 लाख 26 हजार रुपये नकद मिले हैं। तलाशी के दौरान दो मोबाइल फोन, तीन चेकबुक, दो एटीएम कार्ड और बैंक खाते खुलवाने से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए। इसके अलावा कैश जमा और निकासी की रसीदें, GST से जुड़े कागजात और उद्यम संबंधी दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। अब जांच टीम इन दस्तावेजों और मोबाइल में मौजूद डिजिटल जानकारी के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।
निवेश का झांसा देकर शुरू होता था पूरा खेल
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह लोगों को निवेश के जरिए ज्यादा रिटर्न दिलाने का भरोसा देता था। विश्वास में लेने के बाद रकम कथित फर्जी कंपनियों या उनसे जुड़े बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि लेन-देन की असली कड़ी छिपाने के लिए पैसे को कई खातों के साथ गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जाता था। पुलिस अब 5600 करोड़ रुपये के पूरे ट्रांजैक्शन की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसमें वास्तविक साइबर ठगी की रकम कितनी है और कितनी राशि सिर्फ अलग-अलग खातों के जरिए आगे भेजी गई।
कई राज्यों में मिली साइबर शिकायतें
जांच में सामने आए बैंक खातों का कनेक्शन देश के कई हिस्सों में दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों से मिला है। पुलिस के अनुसार दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों से जुड़े मामले सामने आए हैं। इसके अलावा बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में भी इन खातों से संबंधित शिकायतों का रिकॉर्ड मिला है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम सबसे पहले कहां से आई, किन खातों से होकर गुजरी और आखिर में उसे किस माध्यम से निकाला या इस्तेमाल किया गया।
7-8 संदिग्ध पुलिस के रडार पर
पूछताछ और डिजिटल सबूतों की जांच के दौरान 7 से 8 अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस कॉल डिटेल, व्हाट्सऐप चैट और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में किसकी क्या भूमिका थी। साथ ही कथित फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का संचालन कौन करता था, निवेश के नाम पर लोगों से संपर्क कौन करता था और रकम को अलग-अलग खातों में भेजने की व्यवस्था किसके जरिए चल रही थी, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
दस्तावेजों से खुलेगा कंपनियों और खातों का राज
65.26 लाख रुपये नकद के अलावा चेकबुक, एटीएम कार्ड, बैंकिंग फॉर्म और GST व उद्यम से जुड़े दस्तावेजों की बरामदगी को पुलिस अहम मान रही है। जांच टीम इन कागजातों के जरिए संबंधित कंपनियों और कारोबार की जानकारी जुटा रही है। पुलिस का मानना है कि डिजिटल डेटा और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आ सकती है।
BNS और IT Act के तहत केस दर्ज
दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में BNS की धारा 318(4), 308(5), 351 और IT Act की धारा 66(D) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश में जुटी है। पुलिस ने लोगों को ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले लालच से सावधान रहने की सलाह दी है। किसी व्यक्ति द्वारा खुद को पुलिस, CBI, ED, क्राइम ब्रांच या किसी निवेश संस्था का अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करने को कहा गया है। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।




















