142 वाहनों से पांच करोड़ से ज्यादा का नुकसान, CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर FASTag बनवाकर टोल राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नुकसान का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। एसटीएफ की जांच में अब तक 142 ऐसे वाहनों की पहचान हुई है, जिन्होंने कथित फर्जीवाड़े के जरिए लखनऊ के इटौंजा टोल प्लाजा से सैकड़ों बार गुजरकर टोल राजस्व को नुकसान पहुंचाया। शुरुआती आकलन के मुताबिक इससे पांच करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान की बात सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद यह रकम बढ़ सकती है।
तीन अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR
मामले में आरटीओ की ओर से 3 अप्रैल 2026 को सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायत में फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर FASTag बनवाकर टोल पार करने का आरोप लगाया गया था। बाद में मामले की विवेचना उत्तर प्रदेश एसटीएफ को सौंप दी गई।
जांच के दौरान एसटीएफ ने अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें ट्रक मालिक रियाज, उसके भाई सिराज, चालक मुनीश और इंडसइंड बैंक के दो एजेंट शामिल बताए गए हैं।
टोल प्लाजा से सैकड़ों बार गुजरे वाहन
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि चिह्नित 142 वाहनों ने फर्जी FASTag के जरिए इटौंजा टोल प्लाजा से सैकड़ों बार आवाजाही की। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रत्येक वाहन ने कितनी बार टोल पार किया और प्रत्येक मामले में कितना राजस्व प्रभावित हुआ।
एसटीएफ को 1 जनवरी से 3 अप्रैल 2026 तक का टोल और वाहन संबंधी डेटा हासिल करना है। इस डेटा के विश्लेषण से राजस्व नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आने की उम्मीद है।
छह महीने तक नहीं मिला डेटा, फिर STF ने मारा छापा
जांच के दौरान एसटीएफ ने इटौंजा टोल प्लाजा के CCTV फुटेज, वाहनों के गुजरने का रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा मांगा था। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब छह महीने तक अपेक्षित डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद कोर्ट की अनुमति से एसटीएफ ने टोल प्लाजा पर छापा मारकर DVR, सर्वर और अन्य दस्तावेज कब्जे में लिए।
अब इन उपकरणों से पुराने डेटा को रिकवर कराने का काम किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी FASTag वाले वाहन कब-कब टोल से गुजरे और उनके गुजरने के दौरान कितना राजस्व प्रभावित हुआ।
CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की भी आशंका
जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आने की बात कही गई है, जिनके आधार पर CCTV फुटेज और वाहन संबंधी डेटा से छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी यह जांच का विषय है और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
एसटीएफ यह भी जांच रही है कि टोल एजेंसी के कर्मचारियों या अधिकारियों की इस पूरे मामले में कोई भूमिका थी या नहीं। उपलब्ध साक्ष्यों और बरामद सर्वर तथा DVR के डेटा का विश्लेषण पूरा होने के बाद ही किसी की भूमिका के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएगा।
टोलकर्मियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में एसटीएफ को कुछ टोलकर्मियों और अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच करनी पड़ रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि फर्जी FASTag के जरिए लगातार टोल पार करने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं मिलीभगत हो सकती है। हालांकि अभी किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
एसटीएफ अब बरामद दस्तावेजों, DVR, सर्वर डेटा और टोल रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। फर्जी नंबरों के कारण वास्तविक वाहन मालिकों और चालकों की पहचान करना भी जांच एजेंसी के सामने चुनौती है।
NHAI अधिकारी ने भी STF के सामने रखा पक्ष
कोर्ट की अनुमति के बाद एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान NHAI का एक अधिकारी भी एजेंसी के पास पहुंचा और मामले में NHAI की ओर से अपना पक्ष रखा। अब जांच एजेंसी बरामद डेटा और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
फिलहाल पांच करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान शुरुआती आकलन है। पुराने टोल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच पूरी होने के बाद राजस्व नुकसान की वास्तविक रकम, फर्जी FASTag के इस्तेमाल का पूरा दायरा और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।





















