A Book of Resilience: दुनिया भर के चेंजमेकर्स की प्रेरक जीवन यात्राओं पर आधारित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक ‘ए बुक ऑफ रेजिलिएंस’ में ओशो अनुज एवं ओशो फ्रेगरेंस के संस्थापक पूज्य स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी का विशेष लेख शामिल किया गया है। पुस्तक का भौतिक विमोचन 15 अगस्त 2026 को हार्वर्ड विश्वविद्यालय में LOSD एक्सीलेंस अवार्ड्स-हार्वर्ड एडिशन के अवसर पर किया गया। इससे पहले 8 अगस्त को लंदन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ स्किल्स डेवलपमेंट (LOSD) की ओर से पुस्तक का वर्चुअल लॉन्च आयोजित किया गया था। इस अंतरराष्ट्रीय संकलन में विभिन्न देशों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने अपने संघर्ष, अनुभव और जीवन में मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की यात्राएं साझा की हैं। पुस्तक का मूल संदेश ‘Unbreakable, Unstoppable, Unyielding’ यानी अटूट, अदम्य और अडिग बने रहने पर केंद्रित है।
ओशो के जीवन-संघर्ष और आध्यात्मिक यात्रा पर लेख
पुस्तक में शामिल स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी के करीब 500 शब्दों के लेख में ओशो के जीवन के विभिन्न उतार-चढ़ाव, संघर्ष और आध्यात्मिक यात्रा को एक अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। लेख में इस विचार को प्रमुखता दी गई है कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां केवल रुकावट नहीं होतीं, बल्कि वे व्यक्ति के भीतर आत्मचिंतन, आत्म-विकास और चेतना के विस्तार का अवसर भी पैदा कर सकती हैं। ओशो की जीवन यात्रा के माध्यम से इसी विचार को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
रेजिलिएंस को सफलता की कुंजी बताया
पुस्तक के वर्चुअल लॉन्च कार्यक्रम में LOSD की सीईओ डॉ. पैरिन सोमानी ने रेजिलिएंस यानी विपरीत परिस्थितियों में मजबूती से आगे बढ़ने की क्षमता को सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला बताया। उन्होंने चुनौतियों से सीख लेने और लगातार आगे बढ़ते रहने पर जोर दिया। कार्यक्रम में यूके के भारतीय मूल के युवा मेयर तुषार कुमार ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक में शामिल विभिन्न लेखकों की प्रेरक यात्राओं और उनके अनुभवों पर चर्चा की गई।
ओशो के संदेश को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की पहल
पूज्य स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी लंबे समय से ओशो के ध्यान, दर्शन और आध्यात्मिक विचारों को व्यापक समाज तक पहुंचाने के कार्य से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित इस पुस्तक में उनका लेख शामिल होना ओशो की जीवन-दृष्टि और उनके आध्यात्मिक संदेश को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पुस्तक का संपादन प्रो. (डॉ.) पैरिन सोमानी ने किया है। इसका किंडल संस्करण भी उपलब्ध है। संकलन में शामिल स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी का लेख पाठकों को ओशो के जीवन-संघर्ष, आत्मिक विकास और चेतना की यात्रा को एक अलग नजरिए से समझने का अवसर देता है।





















