अयोध्या: धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला के तहत स्वामी आनंद स्वरूप दास महाराज अयोध्या पहुंचे। बड़ी छावनी में आयोजित हो रहे इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन स्थल पर भक्ति और सेवा का माहौल बना हुआ है। स्वामी आनंद दास महाराज ने बताया कि अयोध्या में यह धार्मिक आयोजन पिछले पांच वर्षों से लगातार किया जा रहा है। इस दौरान नवान्न पारण, रामायण, श्रीमद्भागवत कथा, भक्तमाल कथा और नौ दिवसीय यज्ञ सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में उन्नाव, कानपुर, रायबरेली, गोंडा, बस्ती समेत आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए आयोजन स्थल पर निःशुल्क ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाती है, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
बिना किसी बंधन के की जा सकती है सेवा
स्वामी आनंद दास महाराज ने कहा कि सेवा के लिए किसी भी श्रद्धालु पर किसी प्रकार का बंधन नहीं है। जो व्यक्ति अपनी इच्छा से सेवा करना चाहता है, वह इसमें सहभागी हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी श्रद्धालु से अनिवार्य रूप से सहयोग नहीं लिया जाता। उन्होंने इस आयोजन को भगवान की कृपा और संतों के आशीर्वाद से संचालित होने वाली सेवा बताया।
धार्मिक यात्राओं का भी होता है आयोजन
स्वामी आनंद दास महाराज ने बताया कि कानपुर में उनका श्रद्धा तीर्थ यात्रा केंद्र भी है, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न धार्मिक यात्राओं का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आगामी यात्राओं में 6 सितंबर से द्वारका यात्रा, 21 सितंबर से बद्रीनाथ-केदारनाथ सहित उत्तराखंड यात्रा और 5 दिसंबर से रामेश्वरम यात्रा प्रस्तावित है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन धार्मिक यात्राओं की अपनी व्यवस्थाएं और निर्धारित शुल्क हैं, जबकि अयोध्या में चल रहे इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क सेवा की व्यवस्था की गई है।
सेवा को बताया सौभाग्य
वहीं, स्वामी आनंद दास महाराज के साथ सेवा में जुटीं उनकी धर्मपत्नी सुमन लता ने कहा कि भगवान और गुरु के दरबार में सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि इस सेवा कार्य से उन्हें आनंद और संतोष की अनुभूति हो रही है। बड़ी छावनी में चल रहे इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। आयोजन स्थल पर कथा, यज्ञ और अन्य धार्मिक गतिविधियों के बीच भक्ति, सेवा और आध्यात्मिकता का वातावरण बना हुआ है।





















