अमृत उजाला
नई दिल्ली। जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए कथित समझौते पर नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार से मांग की है कि बातचीत में बनी सहमति को लिखित रूप में सार्वजनिक किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक समझौते की आधिकारिक प्रति जारी नहीं की गई और विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए छात्रों व प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने दावा किया कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी। उनके अनुसार, जंतर-मंतर और देशभर में हुए प्रदर्शनों से जुड़े सभी एफआईआर वापस लेने तथा भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नए मुकदमे दर्ज न करने पर भी चर्चा हुई थी।
रंका ने कहा कि संगठन की ओर से समझौते का प्रारूप सरकार को सौंपा जा चुका है और अब सरकार की ओर से लिखित मसौदे का इंतजार है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के वकील दस्तावेज की समीक्षा कर अंतिम रूप देंगे, लेकिन जब तक यह लिखित रूप में सामने नहीं आता, तब तक आंदोलनकारियों के बीच असमंजस बना रहेगा।
कपिल सिब्बल का बड़ा ऐलान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने के लिए देशव्यापी तंत्र बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक विशेष वेबसाइट तैयार की जाएगी, जहां वकील स्वयं को पंजीकृत कर सकेंगे और यह बताएंगे कि वे किस प्रकार की कानूनी सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।
सिब्बल ने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानून का दुरुपयोग होता है, तो उन्हें कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इसी उद्देश्य से उन्होंने ₹1 करोड़ के कानूनी सहायता कोष की घोषणा करते हुए देशभर के वकीलों और समाज के अन्य वर्गों से भी सहयोग की अपील की।
सीजेपी की दो टूक चेतावनी
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार समय रहते लिखित समझौता सार्वजनिक नहीं करती और हिरासत में लिए गए छात्रों व प्रदर्शनकारियों की रिहाई सुनिश्चित नहीं होती, तो संगठन आंदोलन को फिर से शुरू करने का फैसला ले सकता है। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित आधिकारिक दस्तावेज पर टिकी हुई है।






