लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। शुक्रवार शाम लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बीजेपी के कोर ग्रुप की लंबी बैठक हुई। करीब दो घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में चुनावी रणनीति के साथ संगठन को मजबूत करने और सरकार के अभियानों को जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश बीजेपी हाल ही में छह क्षेत्र प्रभारियों के साथ अलग-अलग मोर्चों और क्षेत्रों के लिए जिम्मेदारियां तय कर चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी अब चुनावी तैयारियों को बूथ और जमीनी स्तर तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
बैठक में बड़े नेताओं की मौजूदगी
कोर ग्रुप की बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष, यूपी प्रभारी विनोद तावड़े और सह प्रभारी जगदीश पटेल मौजूद रहे। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी बैठक में हिस्सा लिया। बैठक खत्म होने के बाद पंकज चौधरी ने कहा कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और आने वाले महीनों की कार्ययोजना पर विस्तार से बातचीत हुई। पार्टी की आगामी गतिविधियों और अभियानों को लेकर भी नेताओं ने अपनी बात रखी।
17 सितंबर से शुरू होंगे सेवा और सुशासन अभियान
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से पार्टी की ओर से ‘सेवा संकल्प’ और ‘सुशासन’ अभियान शुरू किए जाएंगे। बैठक में इन कार्यक्रमों की तैयारियों और उन्हें व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना पर भी विचार किया गया। पार्टी का फोकस इन अभियानों के जरिए सरकार की योजनाओं और संगठन की गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाने पर रहने की संभावना है।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक जल्द
पंकज चौधरी ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनकी जिम्मेदारी को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है। ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक बुलाने को लेकर भी चर्चा की गई है। इसमें संगठन के अगले चरण की कार्ययोजना तय की जा सकती है।
बैठक में इस बात पर भी मंथन हुआ कि अगले कुछ महीनों में पार्टी संगठन को किस तरह सक्रिय किया जाए और 2027 के चुनाव को लेकर तैयारियों को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
योजनाओं के साथ महिलाओं और युवाओं पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे। खासतौर पर नई युवा पीढ़ी यानी Gen Z तक सरकार और पार्टी की पहल पहुंचाने के तरीकों पर भी विचार किया गया। बीजेपी आने वाले समय में इन वर्गों के बीच अपनी पहुंच और संवाद को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
बीएल संतोष और विनोद तावड़े की मौजूदगी रही अहम
बैठक में राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष की मौजूदगी को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी करीब एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार लखनऊ पहुंचे। शुक्रवार दोपहर से ही बीजेपी प्रदेश कार्यालय में नेताओं और पदाधिकारियों की गतिविधियां बढ़ गई थीं।
अखिलेश यादव के दावे पर पंकज चौधरी का पलटवार
2027 में सपा की सरकार बनने के अखिलेश यादव के दावे को लेकर भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से सवाल किया गया। इस पर पंकज चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि वह ‘मुंगेरी लाल को सुंदर सपने देखने से रोक’ नहीं सकते। बीजेपी की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है, जब सपा लगातार चुनाव को लेकर अपने अभियान और राजनीतिक गतिविधियां तेज कर रही है।
बीजेपी ने संगठन और कार्यकर्ताओं को बताया आधार
बीजेपी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी संगठन को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी केवल चुनाव के समय सक्रिय होने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच काम करते हैं। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं के प्रदेश दौरे के दौरान संगठन से जुड़ी ऐसी बैठकें होती रहती हैं, जिनसे कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि पार्टी में हर कार्यकर्ता को महत्व दिया जाता है और संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
सपा-कांग्रेस पर भी साधा निशाना
दिनेश प्रताप सिंह ने सपा और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए दोनों दलों की राजनीतिक साझेदारी पर तंज कसा। उन्होंने दोनों को ‘विक्रम और बेताल’ की जोड़ी बताते हुए कहा कि कांग्रेस, सपा के सहारे भी अमेठी और रायबरेली तक जीत हासिल नहीं कर सकती। उन्होंने सपा के शासनकाल को लेकर भी कई आरोप लगाए और कहा कि उस दौरान दलितों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं ज्यादा हुईं। बीजेपी प्रवक्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी राजनीति अब प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया पोस्ट और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह गई है।




















