उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र के गिरजाबाग मोहल्ला निवासी एक मजदूर की स्नातक पास बेटी को आयकर विभाग, चंडीगढ़ की ओर से 20 करोड़ रुपये की आय का ब्योरा मांगते हुए नोटिस भेजा गया है। नोटिस में यह आय कबाड़ के कारोबार से अर्जित बताई गई है। युवती ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के साथ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देकर मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उसने जालसाजी कर फंसाए जाने की आशंका जताई है।
गिरजाबाग निवासी रश्मि सविता ने बताया कि वह बीए उत्तीर्ण हैं और वर्तमान में घर पर ही रहती हैं। उनके पिता अजय शंकर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार दो कमरों के मकान में गुजर-बसर करता है और धूप से बचाव के लिए घर में तिरपाल लगाया गया है।
रश्मि के अनुसार, 9 मई को उन्हें आयकर विभाग, चंडीगढ़ से नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें उनके नाम पर 20 करोड़ रुपये की आय दर्शाते हुए उसका ब्योरा मांगा गया है। नोटिस देखकर वह घबरा गईं। उन्होंने अपने स्तर से नोटिस का जवाब भी भेज दिया है। उनका कहना है कि जिस कबाड़ के कारोबार से इतनी बड़ी आय दिखाई गई है, उससे उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड का उपयोग किस प्रकार किया गया। पीड़िता ने मोतीनगर मोहल्ले में संचालित एक कैफे संचालक पर दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका जताई है।
पीड़िता ने बताया कि नोटिस का जवाब देने के साथ ही उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है तथा साइबर सेल में भी प्रार्थनापत्र दिया है। अब वह अधिवक्ता की सलाह के अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं, भाई बेरोजगार है, एक बहन की शादी हो चुकी है और मां गृहिणी हैं। ऐसे में उनके नाम पर 20 करोड़ रुपये की आय दर्शाए जाने से पूरा परिवार भयभीत और परेशान है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
साइबर थाना प्रभारी राजेश मिश्र ने बताया कि इस संबंध में अभी तक कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैंक खाता खुलवाने के लिए कैफे में दिए थे आधार और पैन कार्ड
रश्मि ने बताया कि कई वर्ष पहले उन्होंने बैंक खाता खुलवाने के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड की फोटोकॉपी मोतीनगर मोहल्ले में स्थित जीजीआईसी के पास एक कैफे में कराई थी। उनका कहना है कि इसके अलावा उन्होंने कहीं भी इन दस्तावेजों का उपयोग नहीं किया। उन्हें आशंका है कि वहीं से उनके अभिलेखों का दुरुपयोग किया गया हो सकता है।








