जिम्बाब्वे को 3-0 से रौंदकर जीती पहली टी20 सीरीज
अमृत उजाला स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया। तीसरे और अंतिम मुकाबले में भारत ने 35 रन से जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम की। यह जीत कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए बेहद खास रही, क्योंकि बतौर कप्तान यह उनकी पहली द्विपक्षीय टी20 सीरीज जीत है।
इस दौरे से पहले भारतीय टीम लगातार दो टी20 सीरीज गंवा चुकी थी। पहले आयरलैंड ने भारत को 2-0 से हराया था, जबकि इसके बाद इंग्लैंड ने 4-0 से मात दी थी। ऐसे में जिम्बाब्वे दौरा टीम इंडिया और कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए वापसी का सुनहरा अवसर था। भारतीय टीम ने इस चुनौती का शानदार जवाब देते हुए एक भी मुकाबला गंवाए बिना सीरीज अपने नाम कर ली।
तीसरे टी20 में भारत का दमदार प्रदर्शन
तीसरे मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 192 रन बनाए। टीम को आक्रामक शुरुआत मिली, जबकि मध्यक्रम में कप्तान श्रेयस अय्यर और रिंकू सिंह ने उपयोगी पारियां खेलकर स्कोर को मजबूत बनाया।
15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने फिर बिखेरा जलवा
सीरीज के सबसे बड़े आकर्षण रहे 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने तीसरे टी20 में 81 रन की शानदार पारी खेलकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।
वैभव ने इस सीरीज में तीन मैचों में 151 रन, दो अर्धशतक और 196 की स्ट्राइक रेट के साथ शानदार प्रदर्शन किया। उनके बेहतरीन खेल के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया। इतनी कम उम्र में उनका आत्मविश्वास और परिपक्व बल्लेबाजी भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का संकेत माना जा रहा है।
गेंदबाजों ने भी निभाई अहम भूमिका
193 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट चटकाए और मेजबान टीम को कभी भी मैच में वापसी का मौका नहीं दिया। पूरी टीम 157 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 35 रन से जीत लिया।
जीत से बढ़ा टीम का आत्मविश्वास
इस क्लीन स्वीप के साथ भारतीय टीम ने हालिया खराब प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए दमदार वापसी की है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में मिली पहली टी20 सीरीज जीत से टीम का मनोबल बढ़ेगा और आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।







