नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब के साहित्य प्रकोष्ठ में सावन की पहली फुहार और मेघों की गर्जना को समर्पित गीतों का आयोजन 22 जुलाई, मंगलवार को सायं 5 बजे गूगल मीट पर सम्पन्न हुआ। विषय रखा गया – बादल, सावन, बरसात और बिजली।
इस गरिमामय आयोजन की संस्थापक डॉ. अर्चना श्रेया के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से यह काव्य-गीत संध्या साकार हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता किरण अग्रवाल ने की, जबकि सुरेश कुमार बंछोर ‘अभ्यर्थी’ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. अर्चना श्रेया ने सभी कलाकारों, अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि का अभिनंदन करते हुए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। संचालन का दायित्व डॉ. प्रियंका भूतड़ा ‘प्रिया’ को सौंपते हुए उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ कराया।
डॉ. प्रिया की सरस्वती वंदना के स्वरों से जब पटाक्षेप हुआ, तो लगा मानो वीणा की झंकार से बादल भी थिरक उठे हों। अध्यक्ष महोदया की अनुमति उपरांत औपचारिक शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि सुरेश कुमार बंछोर ने संस्थापक एवं समस्त कलाकारों को इस सुंदर आयोजन हेतु बधाई दी।
त्पश्चात ऋतु के अनुरूप स्वर लहरियां प्रवाहित हुईं -ममता सक्सेना ने “मौसम है आशिकाना” से माहौल को मधुर बनाया।
डॉ. आनंदी सिंह रावत के कंठ से “रिमझिम गिरे सावन” बरसा।
संतोष तोषनीवाल ने “ओ रे ताल मिले नदी के जाल में…” गाकर श्रोताओं को भाव-समुद्र में डुबो दिया।
डॉ. कुमारी शशि जायसवाल प्रयागराज ने “चिंगारी कोई भड़के” प्रस्तुत किया।
संस्थापक डॉ. अर्चना श्रेया ने “अब के सजन सावन में आग लगेगी बदन में” गाकर समां बांध दिया।
रमेश भाई के “सावनी बदरिया जरा थम के बरसो” ने मन को भिगो दिया।
सरोज आर्य ने “सावन के झूलों ने मुझको बुलाया, मैं परदेसी घर आया” गाकर विरह को स्वर दिया।
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव ने “सावन का महीना, पवन करे शोर” गाया।
अध्यक्ष किरण अग्रवाल ने भी “सावन का महीना” प्रस्तुत कर सबको आनंदित किया।
मुख्य अतिथि सुरेश कुमार बंछोर ने “बरखा रानी जरा झूम कर बरसो” गाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
अजय श्रीवास्तव तुम बिन नहीं जीना प्यारा सा गीत गाया अजय दीक्षित ने भी अपनी मधुर वाणी से सावन को बरसने दो गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
आभा गुप्ता इंदौर की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमा प्रदान की उन्होंने बादल गरजता है प्रसिद्ध गीत को गाया।
अंत में ममता सक्सेना ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। सभी कलाकारों ने संस्थापिका डॉ. अर्चना श्रेया एवं संचालिका डॉ. प्रियंका भूतड़ा को धन्यवाद ज्ञापित किया। अध्यक्ष महोदया की अनुमति से आगामी आयोजन की घोषणा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह संध्या केवल गीतों का संगम नहीं, अपितु शब्द, सुर और सावन का त्रिवेणी संगम था







