त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही आम लोगों की जेब पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजों के दाम पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से ऊपर गए हैं। चीनी के बाद अब दाल, चावल, तेल और सब्जियों की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। वहीं, काजू और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स भी महंगे हो गए हैं। कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है। खासकर त्योहारों के दौरान जब घरों में खरीदारी और खान-पान का खर्च सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाता है, ऐसे में महंगे राशन ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
चीनी के भाव में एक महीने में 20 रुपये की बढ़ोतरी
चीनी की कीमत में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 21 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 45 रुपये प्रति किलो थी। इसके बाद सिर्फ 10 दिनों में भाव बढ़कर 31 जुलाई को लगभग 50 रुपये किलो हो गया। 21 अगस्त तक चीनी की कीमत 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। यानी करीब एक महीने के भीतर इसके भाव में 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
प्याज के दाम में बड़ा उछाल
सब्जियों की बात करें तो पिछले एक सप्ताह के दौरान कई जरूरी सब्जियों की कीमतों में तेजी आई है। प्याज की कीमत ने खास तौर पर लोगों को परेशान किया है। पिछले सप्ताह जहां प्याज करीब 30 रुपये किलो बिक रहा था, वहीं 21 अगस्त तक कई जगह इसका खुदरा भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच गया। यानी कुछ बाजारों में प्याज की कीमत लगभग दोगुनी हो गई। आलू के दाम भी बढ़े हैं। पिछले सप्ताह करीब 20 रुपये किलो बिकने वाला आलू अब 25 रुपये किलो तक पहुंच गया है। हालांकि, टमाटर की कीमत में फिलहाल कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। पिछले सप्ताह और 21 अगस्त को इसका भाव करीब 30 रुपये किलो रहा।
भिंडी से लेकर फूलगोभी तक महंगी
हरी सब्जियों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह 30 रुपये किलो बिकने वाली भिंडी अब करीब 60 रुपये किलो हो गई है। फूलगोभी का भाव 60 रुपये से बढ़कर 100 रुपये किलो तक पहुंच गया। इसी तरह लौकी की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 70 रुपये किलो हो गई है, जबकि करेला 60 से बढ़कर 80 रुपये किलो तक पहुंच गया। अदरक भी महंगी हुई है और इसका भाव 240 रुपये किलो से बढ़कर 280 रुपये किलो हो गया। खीरा 40 रुपये से बढ़कर 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
दाल, चावल और तेल भी नहीं दे रहे राहत
रसोई के बजट पर सिर्फ सब्जियों का ही असर नहीं पड़ा है। रोजमर्रा के राशन की कई दूसरी चीजें भी महंगी हुई हैं। 5 जुलाई से 21 अगस्त के बीच चीनी का भाव 45 से बढ़कर 65 रुपये किलो हो गया। चावल की कीमत 90 रुपये से बढ़कर 100 रुपये किलो पहुंच गई। अरहर दाल भी 120 रुपये से बढ़कर 150 रुपये किलो हो गई। चायपत्ती की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। 5 जुलाई को करीब 380 रुपये किलो बिकने वाली चायपत्ती 21 अगस्त तक 456 रुपये किलो हो गई। चने का भाव 80 से बढ़कर 85 रुपये किलो पहुंच गया। खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला सरसों तेल भी महंगा हुआ है। इसकी कीमत 160 रुपये किलो से बढ़कर 190 रुपये किलो तक पहुंच गई।
काजू और बादाम भी हुए महंगे
त्योहारों के दौरान मिठाई और पकवानों में इस्तेमाल होने वाले ड्राई फ्रूट्स की कीमतों ने भी लोगों की चिंता बढ़ाई है। काजू की कीमत 5 जुलाई को करीब 1,000 रुपये किलो थी, जो 21 अगस्त तक बढ़कर 1,500 रुपये किलो हो गई। यानी इसमें करीब 500 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। बादाम भी महंगा हुआ है। इसकी कीमत 800 रुपये किलो से बढ़कर करीब 1,100 रुपये किलो हो गई है।
बारिश और बाढ़ से प्रभावित हुई सप्लाई
सब्जियों के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह लगातार बारिश और कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति को माना जा रहा है। खराब मौसम के कारण फसलों की आपूर्ति और मंडियों तक पहुंच प्रभावित हुई है। इसका असर खुदरा बाजार में दिखाई दे रहा है। प्याज और आलू जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के भाव बढ़ने से घरेलू खर्च बढ़ गया है। आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग बढ़ने के साथ कीमतों पर दबाव बना रहता है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी। फिलहाल चीनी, दाल, तेल, सब्जियों और ड्राई फ्रूट्स के बढ़ते दाम ने त्योहारों से पहले ही आम परिवारों के किचन बजट का हिसाब बिगाड़ दिया है।





















