405 मेधावियों को पदकों से सम्मानित
आठों कुलाधिपति एवं प्रति-कुलाधिपति पदक छात्राओं के नाम, मुख्य अतिथि प्रो. भूषण पटवर्धन ने भारतीय ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों पर दिया जोर
लखनऊ/बाराबंकी, 22 जुलाई। श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) का भव्य दीक्षांत समारोह बुधवार को गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मुख्य सभागार में आयोजित किया गया। समारोह में वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के कुल 7,519 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। वहीं शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 405 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें 232 स्वर्ण पदक, 165 रजत पदक तथा 8 कुलाधिपति एवं प्रति-कुलाधिपति पदक शामिल रहे।
समारोह के मुख्य अतिथि डेक्कन कॉलेज (मानित विश्वविद्यालय), पुणे के कुलाधिपति एवं आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय अनुसंधान प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) भूषण पटवर्धन तथा विशिष्ट अतिथि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व महानिदेशक एवं पूर्व राजदूत अखिलेश मिश्रा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इं. पंकज अग्रवाल ने की। इस अवसर पर प्रति-कुलपति इं. पूजा अग्रवाल, कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी, शैक्षणिक सलाहकार आरुषी अग्रवाल सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक उपस्थित रहे।
समारोह का सबसे प्रेरणादायी पहलू यह रहा कि वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के सभी आठ प्रतिष्ठित कुलाधिपति एवं प्रति-कुलाधिपति पदक छात्राओं ने अपने नाम किए। कुलाधिपति पदक से आद्या शर्मा, खुशी बुद्धराज, क्रति जैन और मुस्कान बुद्धराज को सम्मानित किया गया, जबकि प्रति-कुलाधिपति पदक प्रणीता यादव, सौम्या सिंह, श्रेया श्रीवास्तव और राहत परवीन को प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय ने इसे छात्राओं की प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतीक बताया।
मुख्य अतिथि प्रो. भूषण पटवर्धन ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और ज्ञान-साधना का उत्सव है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि युवा नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने विश्वविद्यालय की चार वर्षीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2021-22 में जहां विश्वविद्यालय में 4,764 विद्यार्थी अध्ययनरत थे, वहीं वर्ष 2024-25 तक यह संख्या बढ़कर 10,444 हो गई। वर्तमान में करीब 12 हजार विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल प्रवेश संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं, नैतिक मूल्य और नेतृत्व क्षमता से समृद्ध करना है।
कुलाधिपति इं. पंकज अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अर्जित ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और मानवता के कल्याण के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से नवाचार, संवेदनशीलता और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि अखिलेश मिश्रा ने तैत्तिरीय उपनिषद का उल्लेख करते हुए युवाओं को सत्य, धर्म, स्वाध्याय और सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों के निर्वहन का भी नाम है और राष्ट्र का भविष्य युवाओं के हाथों में है।
कार्यक्रम का संचालन परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) आकांक्षा निगम ने किया। समारोह में विश्वविद्यालय के सभी संकायों के अधिष्ठाता, संस्थानों के निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।







