अयोध्या में संतों की बड़ी बैठक,
धर्म मंडपम में आयोजित बैठक में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट पर जताया भरोसा, अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक संयम बरतने का आह्वान।
अयोध्या। मणिराम दास छावनी स्थित धर्म मंडपम में गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेतृत्व में सैकड़ों संतों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं, श्रद्धालुओं की आस्था, फैल रही अफवाहों और रामलला की पूजा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में संत समाज ने कहा कि कुछ व्यक्तियों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संत समाज की छवि धूमिल करना उचित नहीं है। संतों ने कहा कि मामले की जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
संतों ने अयोध्या के पांच प्रमुख संतों को रामलला की पूजा-अर्चना और धार्मिक व्यवस्थाओं से संबंधित धर्म समिति में शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। उनका कहना था कि यह समिति पूजा-पद्धति, रामानंदी परंपरा के संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा ने कहा कि संत समाज को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ईमानदारी और निष्पक्षता पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अपना कार्य कर रही हैं और सत्य सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए।
महंत राजकुमार दास ने कहा कि मामले के आरोपी जेल में हैं और जांच जारी है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
वहीं, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि नौ सदस्यीय धार्मिक समिति रामलला की पूजा-पद्धति, रामानंदी परंपरा के संरक्षण तथा श्रद्धालुओं की धार्मिक सुविधाओं के बेहतर संचालन का कार्य करेगी।
बैठक में संत समाज ने महासचिव चंपत राय के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन रामलला की सेवा के लिए समर्पित किया है और संत समाज उनके साथ खड़ा है।
बैठक के अंत में संतों ने देशभर के रामभक्तों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या दुष्प्रचार से बचें तथा मामले में एसआईटी की जांच पर विश्वास बनाए रखें।







