हर सप्ताह चलेगा स्वच्छता अभियान, उच्च शिक्षण संस्थानों को पर्यावरण संरक्षण में निभानी होगी बड़ी भूमिका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अब सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति ने सभी विश्वविद्यालयों, संबद्ध महाविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने तथा नियमित स्वच्छता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए हैं।
राजभवन की पहल को केवल प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़ा एक व्यापक अभियान माना जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रखकर उन्हें पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी संवेदनशील बनाना है।
हर सप्ताह चलेगा स्वच्छता अभियान
निर्देशों के अनुसार विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अपने परिसरों में साप्ताहिक स्वच्छता अभियान चलाएंगे। इस दौरान परिसर की साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त वातावरण और हरित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्र जीवन में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की आदत विकसित हो जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सकता है।
क्यों जरूरी है सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक?
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है। पानी की बोतलें, प्लास्टिक कप, प्लेट, थैलियां और पैकेजिंग सामग्री उपयोग के बाद अक्सर कूड़े के रूप में फेंक दी जाती हैं। यह न केवल भूमि और जल स्रोतों को प्रदूषित करती हैं बल्कि पशु-पक्षियों और मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक को पूरी तरह नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में शैक्षणिक परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय बनेंगे बदलाव के केंद्र
राज्यपाल की मंशा है कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान न रहें, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनजागरूकता के केंद्र भी बनें। इसी उद्देश्य से संस्थानों को प्लास्टिक के विकल्प अपनाने, कचरे के पृथक्करण, पौधारोपण और हरित परिसर विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया है।
कई विश्वविद्यालयों ने पहले से ही स्टील की बोतलों, कपड़ों के बैग और पुनः उपयोग योग्य सामग्री के प्रयोग को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। अब इस पहल को और व्यापक रूप दिए जाने की तैयारी है।
विद्यार्थियों की भूमिका होगी अहम
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अभियान की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसलिए इस पहल में विद्यार्थियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि युवा पीढ़ी सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का संकल्प लेती है तो इसका असर समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकता है।
स्वच्छ और हरित परिसर की ओर कदम
राज्यपाल के निर्देश ऐसे समय में आए हैं जब जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और कचरा प्रबंधन जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जोड़ना एक दूरगामी पहल मानी जा रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थान इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं और क्या उनके परिसर वास्तव में प्लास्टिक मुक्त एवं स्वच्छ वातावरण की मिसाल बन पाते हैं।








