अब अज्ञात अधिकारियों और फर्मों पर शासन की नजर
उन्नाव। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के ₹3.85 करोड़ के कथित घोटाले में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त आयुक्त मनरेगा संजय पांडेय के निलंबन के बाद अब शासन ने 13 महीने पहले दर्ज एफआईआर में शामिल अज्ञात अधिकारियों, कर्मचारियों, ब्लॉक मिशन मैनेजर (बीएमएम), क्लस्टर स्तरीय फेडरेशन (सीएलएफ) और संबंधित फर्मों के नाम तलब किए हैं। शासन के इस कदम से विकास भवन में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
वित्तीय वर्ष 2023-24 में एनआरएलएम के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, नए समूह गठित करने और प्रशिक्षण देने के लिए 18 अप्रैल से 30 जून 2023 तक विशेष अभियान चलाया गया था। इस योजना के लिए शासन ने 3,558 स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रति समूह ₹10,000 की दर से कुल ₹3.85 करोड़ जारी किए थे।
आरोप है कि इस धनराशि का भुगतान नियमों के विपरीत निजी वेंडरों और उन्नाव, कानपुर देहात तथा चित्रकूट की कुछ फर्मों के खातों में कर दिया गया। शिकायत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने पर 23 मार्च 2025 को तत्कालीन डीडीओ एवं उपायुक्त (स्वरोजगार) संजय पांडेय, जिला मिशन प्रबंधक शिखा मिश्रा तथा अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
13 महीने बाद तेज हुई कार्रवाई
एफआईआर दर्ज होने के बावजूद लंबे समय तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब संयुक्त आयुक्त संजय पांडेय के निलंबन के बाद शासन ने मामले में शामिल अज्ञात बीएमएम, सीएलएफ और भुगतान पाने वाली फर्मों का पूरा विवरण मांगा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
जांच में सामने आईं प्रमुख अनियमितताएं
जांच रिपोर्ट में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं—
- 64 क्लस्टर स्तरीय फेडरेशन (सीएलएफ) में से केवल 47 को ही योजना से जोड़ा गया।
- कई मामलों में भुगतान के बाद धनराशि वापस लेने के आरोप सामने आए।
- 1,96,488 परिवारों को अभियान से जोड़ने का दावा किया गया, जबकि जांच में वास्तविक संख्या 70,713 पाई गई।
- रिपोर्ट में 1,25,775 लाभार्थियों का अंतर मिला, जिससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
- आरोप है कि चित्रकूट की तीन तथा उन्नाव और कानपुर देहात की एक-एक फर्म के पक्ष में एक ही दिन ₹83.75 लाख से अधिक का भुगतान कराया गया।
सीडीओ ने क्या कहा?
मुख्य विकास अधिकारी कृति राज ने कहा कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। अब शासन ने अज्ञात बीएमएम, सीएलएफ और अन्य संबंधित लोगों के नाम मांगे हैं। पुरानी फाइलों से जानकारी जुटाई जा रही है और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। आगे की कार्रवाई शासन के निर्देशानुसार होगी।







