लखनऊ। प्रदेश के ब्लड बैंकों में अब रक्त की हर यूनिट का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। डोनर से लेकर मरीज तक की पहचान और रक्त की पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने रक्त केंद्रों की व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कदम हाल में करीब 200 रक्त केंद्रों के निरीक्षण में सामने आई खामियों के बाद उठाया गया है। यूपी में 200 ब्लड बैंकों और सैंपलों की ELISA टेस्ट अनिवार्य, खाद्य सुरक्षा चैरिटेबल ब्लड बैंकों की जांच के बाद नई गाइडलाइन। · सभी रक्त नमूनों की एलिसा या
नए निर्देशों के तहत ब्लड बैंक में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की मौजूदगी जरूरी होगी। यदि जांच के दौरान निर्धारित तकनीकी कर्मचारी नहीं मिलते हैं तो लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रक्त की एक-एक यूनिट का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर डोनर से लेकर मरीज तक उसकी पूरी जानकारी हासिल की जा सके।
रक्त जारी करने से पहले यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मरीज को वास्तव में रक्त या संबंधित ब्लड कंपोनेंट की जरूरत है। आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर सभी रक्त सैंपलों में संक्रामक रोगों की 100 प्रतिशत जांच अनिवार्य की गई है। इसके लिए एलिसा या केमिल्यूमिनेसेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि संक्रमित रक्त के मरीज तक पहुंचने का खतरा कम किया जा सके।
एफएसडीए ने ये निर्देश औषधि नियमावली, 1945 और राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (NBTC) के मानकों के तहत जारी किए हैं। मकसद साफ है—ब्लड बैंक की व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही न हो और जरूरतमंद मरीज को सुरक्षित रक्त मिले। आने वाले दिनों में इन नियमों के पालन को लेकर रक्त केंद्रों की निगरानी और सख्त होने की उम्मीद है।





















