अम्बेडकरनगर। अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार, 26 जून 2026 को आशीर्वाद फाउंडेशन के तत्वावधान में आशीर्वाद मेडिकल सेंटर, अकबरपुर में जनजागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नशा मुक्ति, उपचार और समाज की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता डॉ. जे. के. वर्मा ने कहा कि नशा एक गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जिसे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों की तरह समझने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इलाज के बाद भी इसके दोबारा होने की संभावना रहती है, इसलिए मरीज और उनके परिजनों को निराश होने के बजाय धैर्य और निरंतर उपचार पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि शुरुआती उपचार दवाओं या अस्पताल में भर्ती कर किया जाता है, लेकिन बाद के चरण में काउंसलिंग, विशेषकर मोटिवेशनल एनहांसमेंट थेरेपी, सबसे प्रभावी माध्यम बन जाती है। इस प्रक्रिया में मरीज को बिना दबाव के सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसमें कई महीने से लेकर दो वर्ष तक का समय लग सकता है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति पर बार-बार दबाव बनाना, नाराज़ होना, मारपीट करना या पुलिस का सहारा लेना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे लोगों को परिवार और समाज से प्रेम, सहयोग और अपनत्व की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि नशामुक्त व्यक्ति ही नशामुक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं। इसके लिए परिवार, समाज, विद्यालयों और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में काउंसलर एवं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुश्री पंजतन ने रोल प्ले के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि जो व्यक्ति इलाज के लिए तैयार नहीं होते, उन्हें किस प्रकार सकारात्मक संवाद और प्रेरणा के जरिए उपचार के लिए तैयार किया जा सकता है।
अम्बेडकरनगर: अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर जागरूकता संगोष्ठी आयोजित









