सीबीआई ने वित्त मंत्रालय और बैंकों को घेरा, मंजूरी में देरी पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली। देश में बैंक धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की रफ्तार आखिर क्यों थम जाती है? इस सवाल को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सख्त रुख अपनाते हुए वित्त मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) के साथ अहम बैठक की। सीबीआई ने साफ कहा कि बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने और आरोपपत्र दाखिल करने के लिए जरूरी मंजूरियां समय पर नहीं मिलने से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच प्रभावित हो रही है।
नई दिल्ली में आयोजित बैठक में सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों और सीवीओ के साथ लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की। एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए और धारा 19 के तहत लंबित मंजूरियों, बैंक धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता, वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस), म्यूल अकाउंट तथा न्यायालयों के हालिया फैसलों पर विस्तार से चर्चा की।
सीबीआई अधिकारियों ने चिंता जताई कि कई मामलों में बैंक अपने अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने में अनावश्यक विलंब करते हैं। इससे न केवल जांच प्रभावित होती है, बल्कि आरोपपत्र दाखिल होने में देरी के कारण मुकदमों की सुनवाई भी लंबी खिंच जाती है। कुछ मामलों में विशेष अदालतों के बजाय सामान्य अदालतों में सुनवाई होने की नौबत आ जाती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और जटिल हो जाती है।
सीबीआई ने स्पष्ट किया कि किसी बैंक अधिकारी के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, जबकि आरोपपत्र दाखिल करने से पहले धारा 19 के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति लेना अनिवार्य है। एजेंसी का कहना है कि इन प्रक्रियाओं में होने वाली देरी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में बड़ी बाधा बन रही है।
बैठक के दौरान बैंक धोखाधड़ी से संबंधित लंबित दस्तावेजों, शिकायतों के निस्तारण, ओटीएस मामलों और म्यूल अकाउंट से जुड़ी चुनौतियों की भी बैंकवार समीक्षा की गई। कई लंबित मामलों के समाधान पर सहमति बनी और सीबीआई तथा बैंकों के बीच दस्तावेजों के त्वरित आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में सीबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने, मंजूरी की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध करने तथा बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच में तेजी लाने पर सहमति बनी। एजेंसी ने दोहराया कि आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है।








