उन्नाव। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने उन्नाव बाईपास स्थित एक गेस्ट हाउस में खाद्य कारोबारियों के साथ जागरूकता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में थोक विक्रेताओं को प्रत्येक बिक्री पर बिल जारी करने तथा फुटकर विक्रेताओं को खरीद का बिल अनिवार्य रूप से लेने की सलाह दी गई। साथ ही बताया गया कि अब खाद्य सुरक्षा अधिकारी किसी भी प्रतिष्ठान की जांच के दौरान विभागीय परिचय पत्र साथ रखेंगे।
कार्यक्रम में सदर, हसनगंज, गंगाघाट, बीघापुर, पुरवा और बांगरमऊ क्षेत्र के होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई, बेकरी एवं किराना कारोबारियों ने भाग लिया।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अखिलेश अवस्थी ने 25 जून को एक आइसक्रीम निर्माण इकाई से पांच नमूने लिए जाने का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि किसी प्रतिष्ठान से आवश्यकतानुसार सीमित संख्या में ही नमूने लिए जाएं।
इस पर सहायक आयुक्त (खाद्य), लखनऊ मंडल विनीत कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया कि नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ही लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी खाद्य पदार्थ को केवल उसी स्थिति में नष्ट कराया जाता है, जब वह मानव उपभोग के लिए अत्यधिक खराब या असुरक्षित पाया जाता है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष रजनीकांत श्रीवास्तव ने भी खाद्य कारोबारियों की विभिन्न समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। वहीं कारोबारी उमेश राठौर और बृजेश गुप्ता ने भी नमूना जांच प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे।
सहायक आयुक्त ने कहा कि सभी थोक विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटरों के लिए बिल देना अनिवार्य है, जबकि फुटकर विक्रेताओं को प्रत्येक खरीद का बिल अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभागीय पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से अब सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारी जांच के दौरान अपना विभागीय परिचय पत्र साथ रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उसे प्रदर्शित भी करेंगे।
कार्यक्रम में सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय प्रियंका सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश दीक्षित, खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में खाद्य कारोबारी मौजूद रहे।








